फरीदाबाद। समाजसेवी हरीश चन्द्र आज़ाद ने कहा है कि किसी भी सीट पर एक ही उम्मीदवार होने पर यदि मतदाता के पास नोटा (इनमें से कोई नहीं) का विकल्प मौजूद है तो संबधित प्रत्याशी का मतदान कराए बिना निर्विरोध कैसे हो सकता है यह पूरी तरह से गैर कानूनी है। उन्होंने साफ कहा कि नोटा के होते हुए निर्विरोध चुनना मतदाता को नोटा के मौलिक अधिकार से वंचित करना है।
हरीश आज़ाद ने कहा कि अभी फरीदाबाद के नगर निगम चुनावों में वार्ड नम्बर 36 से भाजपा को छोडक़र बाकि सभी उम्मीदवारों के नाम वापिस लेने से भाजपा के उम्मीदवार को निर्विरोध चुना गया जोकि कि गैर कानूनी है इसके खिलाफ मैं कोर्ट में जाकर वार्ड नम्बर 36 के मतदाताओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाऊंगा क्योंकि जब तक नोटा का अधिकार मतदाता के पास है तो किसी को भी निर्विरोध नहीं चुना जा सकता।
आज़ाद ने कहा कि चुनावी प्रतिक्रिया में बहुत सुधारों की आवश्यकता है जैसे किसी पार्टी के उम्मीदवार को नाम वापिस लेने का अधिकार नहीं होना चाहिये क्योंकि इससे उम्मीदवारों को बिठाने का प्रयास किया जा सकता है और यह सब इन पार्षद के चुनावों में खुलेआम हुआ है जिसके सबूत मिलने के बाद इसका खुलासा प्रैसवार्ता करके किया जायेगा। जिस-जिस उम्मीदवार को बैठने के लिये दबाव बनाया गया उनको इकठा करके प्रैस वार्ता की जायेगी।
उन्होंने कहा कि यह सरासर लोकतंत्र की हत्या है और देश का कोई भी नागरिक इसको बर्दाश नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि वोटिगं मशीनें मतगणना वाले दिन 100 प्रतिशत चार्ज थी जिसका मैं गवाह हूँ और हमने फार्म 17 पर लिखा भी है।
ज़रा सोचिए 10 घंटे मशीन चुनावों वाले दिन चली है और उसके बाद 10 दिन पड़ी रही है फिर 100 प्रतिशत कैसे चार्ज हो सकती है इसका जवाब चुनाव आयोग को देना होगा। आज़ाद ने कहा कि मैने स्वयं वार्ड नम्बर 37 के टेबल नम्बर 6 के अधिकारी को गिनती वाले दिन कहा था कि मशीन 100 प्रतिशत चार्ज कैसे है तो अधिकारी के पास इसका कोई जवाब नहीं था।
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