एक नया हिन्दुस्तान बन रहा है, सच कह रहे हैं राहुल गांधी, विद्रोही

3 नवम्बर 2016: स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि वन रैंक वन-वन पैंशन को ईमानदारी से लागू न करने के विरोध में दिल्ली में आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाने वाले बामला-भिवानी के पूर्व सैनिक सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल की आत्महत्या को हार्ट अटैक से सामान्य मौत दिखाने के लिए मोदी सरकार ने षडयंत्र रचा था जो रामकिशन के परिवारजनों की सर्तकता व राहुल गांघी के संघर्ष के कारण फेल हो गया। विद्रोही नेे सवाल किया कि यदि सरकार ने ऐसा कोई षडयंत्र नही रचा था तो राहुल गांधी को रामकिशन के परिवारजनों से मिलने से रोकने के लिए मोदी सरकार ने पुलिस का दुरूपयोग करके राहुल सहित कांग्रेस नेताओं, दिल्ली के सीएम केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को हिरासत में लेने की जरूरत क्या थी? राहुल गांधी व अन्य नेताओं की गिरफ्तारी से स्पष्ट है कि मोदी सरकार सूबेदार रामकिशन की वन रैंक-वन पैंशन लागू न करने के विरोध में की गई आत्महत्या को स्वभाविक मौते में बदलना चाहती थी ताकि सरकार शर्मसार न हो सके। वहीं मृतक पूर्व सैनिक द्वारा अपने बेटे को मौत से पहले किये गए फोन टेप को हथियाने के लिए भी उसके परिवारजनों को गिरफ्तार किया गया था।
विद्रोही ने कहा कि यह अलग बात है कि राहुल गांधी के संघर्ष के कारण मोदी सरकार व पुलिस अपने मंसूबों में कामयाब नही हो पाई और सच्चाई देश के सामने आ गई। मोदी राज में यह कैसा लोकतंत्र है कि विपक्ष के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी व दिल्ली के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री को मृतक के परिवारजनों से मिलकर शोक प्रकट तक नही करने दिया गया? राहुल गांधी का यह कथन सही है कि एक नया हिन्दुस्तान बन रहा है जहां अभिव्यक्ति की स्वतत्रंता पर रोक लगाने व सरकार के विरोध को भी अपराध मानने की मानसिकता उभर रही है।
विद्रोही ने देश के आमजनों से आग्रह किया कि यदि अब भी नही चेते और मोदी-भाजपा-संघ की फासिस्ट सोच के खिलाफ खड़े नही हुए तो वे अनुमान लगा सकते है कि जब राहुल गांधी व दिल्ली के सीएम-डिप्टी सीएम के साथ मोदी सरकार व उसकी पुलिस ऐसा अलोकतांत्रिक व्यवहार कर सकती है तो आवाज उठाने, अपनी मांगे सामने रखने, सरकार के अत्याचार व जनविरोधी नीतियों का विरोध करने पर आम आदमी की मोदी सरकार क्या गत करेगी? विद्रोही ने कहा कि सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल ने अपनी शहादत देकर वन रैंक-वन पैंशन मामले में मोदीजी के दावों को बेनकाब कर दिया है और भूतपूर्व सैनिकों की वन रैंक-वन पैंशन ईमानदारी से लागू करवाने के संघर्ष को मजबूती प्रदान कर दी। बामला के पूर्व सरपंच सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल की शहादत को शत-शत नमन।
विद्रोही ने कहा कि हरियाणा में भी भाजपा सरकार बनने के बाद विगत डेढ़ साल में लगभग 75 किसान फसल बर्बादी व कर्ज के बोझ के कारण क्या तो आत्महत्या कर चुके या हार्ट फेल होने से मर गए है। अब तो हद हो गई तब वन रैंक-वन पैंशन के सवाल पर हरियाणा के ही भूतपूर्व सैनिक को आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा। मोदीजी राज में किसान व जवान दोनो सरकार की बेरूखी के कारण आत्महत्याएं कर रहे है, इससे बुरे दिन देश में और क्या आएंगे।
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