मौत की सवारी,नौनिहालों की जिन्दगी का रखवाला कौन?

राकेश शर्मा कुरूक्षेत्र-Rakesh Sharma
परिवहन सुविधा के नाम पर निजि स्कूलों ने बच्चों को घर से ले जाने व घर तक छोडऩे की जिम्मेवारी के नाम पर बच्चों के माता पिता की जेब पर ढाका डाल रहे है लेकिन क्या उनकी सुरक्षा को जिम्मेवारी को स्कूल पूरी ईमानदारी से निभा रहे है कुछ दिन पहले ही एक ऐसा मौत का मंजर हमारे सामने आया जिसने फिर हमें सोचने पर मजबूर कर दिया जब उतर प्रदेश में एटा जिले में स्कूल वाहन की टक्कर में छोटे छोटे बच्चों की मौत का जिम्मेवार कौन है? क्या सरकार या फिर प्रशासन ऐसी घटनाओं की बाट देखती है कि कब घटना घटे ओर हम कोई कदम उठा सके। आज ना जाने कितने निजि स्कूलों की भरमार है जो ये गांरटी लेती है कि हम आपके बच्चों को अच्छी शिक्षा की जिम्मेवारी लेते है पर उनकी जिन्दगी से खिलवाड़ आज भी सरेआम हो रहा है ओर प्रशासन मौत का खेल अपनी ही आखों से देख रहा है। यदि सुप्रीम कोर्ट गाईडलाइन पर एक नजर डाले जो स्कूल बस के लिए दी गई है तो शायद ही कोई स्कूल बस इसमें खरा उतर पायें।
स्कूली बस के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाईन—
1. बसों की आगे पीछे स्कूल बस लिखा होना चहिए।
2. स्कूली बसों में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की व्यवस्था होनी चाहिए।
3.प्रत्येक बसों मे आग बुझाने के उपकरण होने चाहिए।
4.अगर किसी एजेंसी से बस अनुबंध पर ली गई है तो उस पर ऑन स्कूल डयुटी लिखा होना चाहिए।
5.बसों की सीट क्षमता से अधिक बच्चे नही होने चाहिए।
6. प्रत्येक स्कूल बस में हॉरिजेंटल ग्रिल लगे होने चाहिए।
7. स्कूल बस पीले रंग को हो, जिसके बीच में नीले रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम और फोन नंबर होना चाहिए।
8.बस की सीट के नीचे बैग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।
9.बसों में टीचर जरूर होने चाहिए,जो बच्चों पर नजर रखें।
10.प्रत्येक बस चालक को कम से कम 5 साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए।
11.किसी भी ड्राईवर को रखने से पहले उसका सत्यापन जरूरी है। एक बस मे कम से कम दो चालक होने चाहिए।
12. चालक का कोई चालान नही होना चाहिए ओर ना ही उसके खिलाफ केाई मामला दर्ज हो।
अखिर कब तक हमारे देश मेें नियमो का ताक पर रख कर अपनी मनमर्जो करते रहगे लेकिन कड़वी सच्चाई ये भी है कि हमारे देश में निजि स्तर पर होने वाला भ्रष्टाचार भी जिम्मेदार है। प्रशासन आदेश तो दे देता है लेकिन जमीनी स्तर पर आदेश लागू नही हो पात। क्योंकि जिन लोगो पर आदेश को लागू करवाने की जिम्मेदारी है वो लापरवाही की चादर ओढ़कर सोए रहते हैओर बच्चों के माता पिता तक ये आदेश पहुंचते ही नही। इसलिए आप सभी पाठकों से अपील है कि आप के बच्चें भी स्कूल में सुबह सुबह तैयार होकर पढऩे के लिए जाते है तो हम सब कि जिम्मेवारी बनती है कि स्कूलों के लिए बनाई गई गाईडलाईन जो सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में जारी की थी उसको स्कूल प्रशासन केा जरूर बतायें ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके ओर हमारे नौनिहालों का जीवन सुरक्षित हो पायें——————