अपने कामकाज का जायजा लेने खट्टर सभी जिलों में भेजेंगे दूत

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CHANDIGARH:प्रदेश के सभी जिलों में अपने ‘सुशासन सहयोगी’ नियुक्त करने के बाद अब खट्टर सरकार ने सीएमओ (मुख्यमं त्री कार्यालय) को फील्ड में उतारने का फैसला लिया है। सीएम के प्रधान सचिव को छोड़कर अधिकांश अधिकारियों तथा ओएसडी व एडवाइजर को मैदान में उतार दिया है। महीने में तीन दिन तक ये अधिकारी लोगों के बीच रहकर उनकी नब्ज टटालेंगे। मुख्य मकसद होगा सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल पर फीडबैक हासिल करने का।
ये अधिकारी अपनी रिपोर्ट सीधे सीएम मनोहर लाल खट्टर को देंगे। 26 अक्तूबर को सरकार का दो वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है। सीएमओ से जुड़े सूत्रों के अनुसार फील्ड से जो रिपोर्ट सरकार के पास पहुंच रही है, उससे सरकार चिंतित है। इसी को देखते हुए अब अधिकारियों, सलाहकारों व विधायकों की ड्यूटी लगाई है कि वे लोगों के बीच जाकर सच्चाई जानें। यही नहीं, मुख्यमंत्री की घोषणाओं, जिलों की विकास परियोजनाओं तथा केंद्र व राज्य से जुड़े अहम प्रोजेक्ट को लेकर भी सीएम के ये ‘दूत’ जमीन हकीकत का पता लगाएंगे।सीएम ने जिलावार एक-एक अधिकारी को नियुक्त किया है। इन अधिकारियों को हर महीने फील्ड में जाना होगा।  इन अधिकारियों में मुख्य रूप से सीएम के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ़ राकेश गुप्ता, राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा, राजनीतिक सचिव दीपक मंगला, ओएसडी भूपेश्वर दयाल, कैप्टन भूपेंद्र सिंह, अमरेंद्र सिंह, हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन जवाहर यादव, मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा, पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता, वेदपाल एडवोकेट व जवाहर सैनी सहित 21 लोगों को एक-एक जिले का जिम्मा सौंपा गया है।
सीएमओ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिलों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर जिलों में कार्यरत पुलिस व सिविल प्रशासन के अधिकारियों की बदली भी हो सकती हैं। बताते हैं कि अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करने की भी योजना है। हालांकि कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का यह भी कहना है कि ओएसडी व एडवाइजर को जिलों में भेजने का मतलब है कि सरकार को जिलों के अधिकारियों पर भरोसा नहीं रहा है।

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