राजनीति से ऊपर उठ प्रदेश के विकास के लिए काम करने की जरूरत, खट्टर

चंडीगढ़, 4 नवम्बर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि हमें राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश के विकास और प्रदेश की जनता के उत्थान के लिए कार्य करना होगा, व्यवस्था परिवर्तन तथा जन चेतना के लिए सभी को आगे बढक़र कार्य करना होगा। उन्होंने राजनीतिक दलों व प्रदेश की जनता से अपेक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास और उत्थान के लिए सभी अपना-अपना सहयोग दें। 
मुख्यमंत्री, जो सदन के नेता भी है, आज यहां विधानसभा में स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर बुलाए गए एक विशेष सत्र में उपस्थित सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। 
उन्होंने प्रदेश में अध्यापकों के स्थानातंरण के मामले पर कहा कि स्थानातंरण एक उद्योग का रूप ले चुका था और दस प्रतिशत तक अध्यापक चण्डीगढ के चक्कर काटते रहते थे। उन्होंने कहा कि विशेष कर शिक्षा विभाग में ऐसी नीति बनाई गई हैँ जिसमें पारदर्शिता को रखा गया है और अब आनलाईन अध्यापकों का स्थानातंरण किया जाता है। उन्होंने कहा कि नीति के तहत तीन श्रेणी के 51 हजार अध्यापकों के स्थानांतरण आज या कल में होने वाले हैं जिसमें 93 प्रतिशत अध्यापकों को उनकी मनपंसद का स्थान मिला हैं और 7 प्रतिशत लोगों को भी काफी संतुष्टि हैं। उन्होंने कहा कि 100 प्रतिशत दिव्यांगों के के लिए मैन्यूल स्थानांतरण की प्रणाली होगी,ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पडे। 
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नौकरियों की भर्तियों के बारे में कहा कि पहले पिछले दरवाजे से भर्ती करने का इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि योग्य व्यक्ति ही आगे आएं, क्योंकि हम जिस व्यक्ति को नौकरी में रख रहे हैं वह 30 से 35 साल के लिए नौकरी में होगा और सही व्यक्ति होगा तो आने वाले समय में सही कार्य होगा और जनता के हित में कार्य होगा। यदि गलत या अयोग्य व्यक्ति भर्ती होगा तो आने वाले समय में सरकार और समाज दोनों का अहित होगा। इसलिए भर्तियों में जैसे कि एचसीएस, पुलिस, क्लर्क या किसी भी पद की भर्ती हो, उनमें पारदर्शिता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार के 12 प्रतिशत अंक रखे गए हैं और पुलिस भर्ती में तो केवल 5 प्रतिशत ही अंक रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि हमने व्यवस्था परिवर्तन का कार्य किया है। 
उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य को संस्कृति व लोककला की दृष्टि से अपनी पहचान मिले इसके लिए भी प्रदेश सरकार द्वारा प्रयत्न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गीता जयंती के अवसर पर गांव में कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगें। इसके अलावा, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा भी संस्कृति एवं कला को बढावा देने के लिए अपने स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में हरियाणावी फिल्मों को बढावा देने के लिए आगामी 31 दिसंबर, 2016 तक फिल्म नीति को लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान फिल्म महोत्सव भी मनाया जाएगा, इसके लिए योजना बनाई जा रही है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान को शुरू करके समाज परिवर्तन का कार्य किया गया है ताकि लिगंानुपात में सुधार किया जा सके। इसी कडी में स्वच्छ भारत अभियान की तर्ज पर स्वच्छ हरियाणा अभियान भी शुरू किया गया जिसमें निजी संस्थानों के साथ-साथ गैर सरकारी संस्थाओं को जोडते हुए शिक्षा विभाग, स्थानीय निकायों के सहयोग संस्कारों को आगे बढाया जा रहा है। 
उन्होंने कहा कि किसानों के उत्थान के लिए भी प्रदेश सरकार प्रयासरत हैं और इस दृष्टि से प्रदुषण के प्रति किसानों व लोगों को जागरूक किया जा रहा  है, कि किस प्रकार से प्रदुषण जीवन के लिए हानिकारक है और इसे किस प्रकार से ठीक किया जा सकता है, इस पर भी कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन को बढावा देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा भरसक प्रयास किया जा रहा है। 
उन्होंने कहा कि स्वर्ण जयंती वर्ष के आज के सत्र में काफी अच्छी चर्चा हुई, जिसमें 50 वर्ष के हरियाणा निर्माण के इतिहास के बारे में बताया गया। उन्होंने बताया कि आज भविष्य के विजन के लिए सुझाव आएं हैं, सरकार उन पर कार्य करेगी। उन्होंने अपेक्षा करते हुए कहा कि विपक्ष या जो भी इस संदर्भ में लोगों से उम्मीद हैं, प्रदेश की ढाई करोड जनता से भी इस पर राय होगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा निर्माण के लिए जो भी संघर्ष या आंदोलन हुए और जिनमें एक, दो, पांच या दस नेताओं या व्यक्तियों को ही श्रेय नहीं है, बल्कि हरियाणा निर्माण में प्रदेश की सारी जनता को श्रेय जाता है। 
उन्होंने बताया कि पहली बार जैन कवि पुष्पदंत और श्रीधर ने 10वीं शती के साहित्य मे हरियाणा की पहचान को उजागर किया। वर्ष 1923 में स्वामी सत्यानंद ने लाहौर में अलग से हरियाणा की मांग की थी, दीन बंधु छोटूराम और देशबंधू गुप्ता ने भी इस मांग को आगे बढाया, जिन्हें इसका श्रेय जाता है। लंदन की दूसरी गोलमेज कान्फ्रेंस में जोफरी कारबेट ने अलग हरियाणा (अंबाला डिवीजन) का प्रस्ताव दिया। उन्होंने बताया कि कुरूक्षेत्र के रूप में या पंजाब के दक्षिणी भाग के अलग गठन का जिक्र आया। आजादी से पहले देश के किसी भी प्रोविंस से अलग राज्य निकालना आसान नहीं था। हालांकि संयुक्त पंजाब का विभाजन पहले ही हो गया और देश की आजादी के समयकाल में यह घटना हमेशा याद रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि उस समय पंजाब के एक भाग में ज्यादा प्रगति हो रही थी और आज हरियाणा के क्षेत्र में प्रगति कम हो रही थी। 
उन्होंने सदन के सदस्यों को स्मरण करवाते हुए कहा कि पटटा सीमा रमैय्या ने भी हिन्दी आंदोलन के दौरान हरियाणा के अलग गठन का समर्थन किया था। उन्होंने बताया कि जब अलग प्रांतों की मांग का फ्रंट बना तो उसमें मुख्य भूमिका पंडित श्रीराम शर्मा, पंडित बाबुदयाल शर्मा, मास्टर नानुराम, चौ श्रीचंद, चौ सूरजमल, चौ. सूरजमल, चौधरी मारू सिंह मलिक, चौधरी धर्म सिंह राठी, कामरेड रणधीर सिंह, चौ निहाल सिंह तकसक, चौ राम सिंह, चौ इंद्र सिंह, चौ प्रताप सिंह दौलता सीपीआई अैर चौधरी लहरी सिंह जनसंघ आदि  थे और थोडे समय बाद चौधरी देवी लाल इत्यादि भी इस आंदोलन में जुड गए। उन्होंने कहा कि हरियाणा के निर्माण में प्रदेश की जनता का भी अहम योगदान हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विजन बना, तकनीक आती गई है, वैसे-वैसे हरियाणा का प्रगति करता गया। इन्फ्रंास्ट्रक्चर, बिजली और नहरों आदि आती गई है और आवश्यकतानुसार हरियाणा प्रदेश प्रगति की राह पर आगे बढ़ता गया।