फरीदाबाद के जो हिस्से सड़ने से बचे हैं उन्हें भी नरक बनाने की तैयारी

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फरीदाबाद, 8 सितंबर : नगर निगम अधिकारियों में शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की इच्छाशक्ति का अभाव और नेताओं की उदासीनता के चलते शहर नर्क में तब्दील होता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगाते इन अधिकारियों को न तो शहर में गंदगी के ढेर दिखाई देते हैं और न ही उफनते हुए सीवर। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गंदगी के चलते शहर में बीमारियों ने पैर पसार लिया, कोई घर ऐसा नहीं है जो बीमारियों की चपेट में न हो। मगर नगर निगम को इससे क्या, कोई जिये या मरे इनकी बला से।
डाक्टरों की दुकान पर लगी मरीजों की भीड़
सरकारी बीके अस्पताल हो, ईएसआई या फिर निजी डाक्टरों के क्लीनिक हर तरफ मरीजों की लंबी-लंबी लाइन लगी है। कई घर तो ऐसे है जहां पूरा का पूरा परिवार बीमार पड़ा है। डाक्टरों की माने तो कुछ तो बदलता हुआ मौसम और दूसरा शहर में फैली गंदगी इन बीमारियों की मुख्य वजह है। साफ सफाइ हो जाए तो इन बीमारियों पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
शिकायतों के बावजूद नहीं होती कार्रवाई
नगर निगम के एनआईटी एक, दो, तीन, पांच, तिकोना पार्क सहित किसी भी केंद्र का रजिस्टर उठा कर देख लिया जाए तो उसमें 90 प्रतिशत शिकायतें सीवर जाम की होंगी। मगर इनमें से 40 प्रतिशत पर भी कार्रवाई नहीं होती है। सफाईकर्मियों का कहना है कि न तो उनके पास संसाधन हैं और न ही कर्मचारी ऐसे में काम कैसे हो।
नहीं है कोई ठोस योजना
बढ़ती आबादी के हिसाब से सीकुड़ती सीवर लाइनों को बदलने अथवा उनकी अच्छी तरह से साफ सफाई के लिए नगर निगम के पास कोई ठोस योजना नहीं है। अधिकारी कते हैं कि उन्होंने एनआईटी क्षेत्र की सीवर लाइनें बदलवाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर सरकार के पास भेज रखा है, जब वह मंजूर होकर आएगा तभी लाइनें बदली जाएंगी तो उससे पहले सीमेंटिड सड़कें क्यों बना रहे हो के सवाल पर उनके पास कोई जवाब नहीं होता।
बिना नागा जाता हूं शिकायत केंद्र, नहीं होती कार्रवाई
तिकोना पार्क स्थित शिकायत केंद्र पर एनआईटी एक आर्य समाज रोड से सीवर जाम की शिकायत दर्ज करवाने आए अशोक कुमार बताते हैं आर्य समाज रोड की सीवर लाइन पिछले करीब दो माह से जाम पड़ी है। सीवर का गंदा पानी उनके घर के गेट पर जमा है, जिसके चलते उनका पूरा परिवार चिकनगुनिया की चपेट में है। वे रोजाना सुबह गुरुद्वारे में माथा टेक कर सीधे शिकायत केंद्र आते हैं। यहां मौजूद अधिकारी व कर्मचारी अभी भेजते हैं या अभी आते हैं कह कर चलता कर देते हैं। एक दो बार कर्मचारी आए भी तो खानापूर्ति करके चले जाते हैं।
जनता भी नहीं कम कसूरवार
सीवर जाम का सारा ठीकरा नगर निगम के सिर फोड़ना भी ठीक नहीं है। आर्य समाज रोड पर खुली स्वीटस शाप सहित खानपान की अन्य दुकानें अपने यहां से निकलने वाली सारी गंदगी सीवर लाइनों में ही डालते हैं। सीवर लाइन जाम होने की यह भी एक मुख्य वजह है।
ये है समाधान
नगर निगम के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि एनआईटी क्षेत्र में जब सीवर लाइन डाली गई थी तब यहां की आबादी करीब 50 हजार थी। आबादी बढ़ती गई और सीवर लाइनें सिकुड़ती चली गई। वैसे तो इसका हल नई सीवर लाइन ही है, मगर इसमें काफी समय लगेगा। नगर निगम छोटी शिट क्लीनिंग मशीनों से इन लाइनों की सफाई करवा कर लोगों को फौरी राहत दिला सकता है। जो सफाई शिट क्लीनिंग मशीनों से होगी, वो सुपर सकर मशीन से भी नहीं हो पाएगी।

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