ऊँट पर बैठ कर भाषण देने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री बने खट्टर

Haryana CM At Camel

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री भारत के ऐसे पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं जिन्होंने ऊँट पर बैठ कर भाषण दिया है। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के ऊँट पर बैठकर भाषण वाली खबर पसंद की जा रही है लेकिन लोग हंसी मजाक भी कर रहे हैं। कल गांव पाजू में मुख्यमंत्री ने सहर्ष सजे हुए ऊंट पर चढऩा स्वीकार किया था और ऊंट पर बैठे-बैठे ही अपना संबोधन दिया था। नहरों में पहली बार इतना पानी देख मुख्यमंत्री बहुत ज्यादा खुश हुए थे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि कि दक्षिणी हरियाणा के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ जिले में नहरों पर लगे पंप बदले जाएंगे। भिवानी और दादरी क्षेत्र में पंप हाऊसों की स्थिति सुधारने के लिए 150 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी।

बहल के बीआरसीएम विद्याग्राम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नहरी पानी के प्रबंधन पर पहली बार सरकार द्वारा काम करते हुए टेल तक पानी पहुंचाने का कार्य किया गया है। इनमें से कुछ नहरें तो ऐसी थीं, जिनका वजूद ही खत्म हो चुका था। लोहारू और बहल की नहरी टेलों का रेत निकलवा कर और उनकी सफाई कर पानी भिजवाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व.चौ. बंसीलाल ने इन नहरों का निर्माण करवाया था, जिनमें पानी पहुंचाने का काम मौजूदा सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि नलकूपों पर ऊर्जा बचत के लिए सोलर पावर प्रोजेक्ट से बिजली दी जाएगी। यही कार्य खेतों में बनी ढाणियों तक बिजली पहुंचाने के लिए किया जाएगा। सौर ऊर्जा बिजली आपूर्ति का उत्तम विकल्प है और इसमें ग्रामीणों का सहयोग भी लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पानी के बिना जीवन बड़ा दूभर हो जाता है। इसलिए पानी का सही उपयोग करना जरूरी है। इस समय जो पानी आया है, ग्रामीणों को उसे स्टोर करने की सलाह दी गई है। क्षेत्र के निवासियों ने भी इस पर सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों से ही इस क्षेत्र में कपास की पैदावार आरंभ हुई है। क्षेत्र के भाजपा नेता जेपी दलाल ने भी लगातार इस दिशा में प्रयास किए हैं, जिसके सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं।
पत्रकारवार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि सतलुज यमुना लिंक नहर, लखवारी, रेहासी, रेणूका व हांसी-बुटाना सिंचाई परियोजनाएं पूरी होने के बाद नहरी पानी की आपूर्ति और सुचारू की जाएगी। सरकार का पूरा प्रयास है कि सभी नहरों की टेल तक किसानों को पानी मिले। उन्होंने बताया कि पानी की पूर्ति के लिए यहां टपका सिंचाई पद्धति को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए अनुदान पर लाभदायक योजनाएं शुरु की जाएंगी।

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