Haryana Sps: पिछली सरकार ने एक जीजा पाला, इस सरकार ने अनेकों?

faridabad

ये ऑडियो सुनिए। हरियाणा पुलिस के एक आईजी स्तर के अधिकारी जो प्रदेश सरकार के ही एक ईमानदार मुख्य संसदीय सचिव डॉ. कमल
गुप्ता के कहने पर एक बिल्डर के ख़िलाफ़ मामले की जाँच करवा रहे हैं मुख्यमंत्री के ओएसडी विजय शर्मा के फ़ोन से परेशान हैं जो बार-बार पुलिस को बिल्डर को “परेशान” न करने की सिफारिश कर रहा है। इस ऑडियो में झलकता ईमानदार अफ़सर का फ्रस्ट्रेशन आप साफ़ सुन सकते हैं। बिल्डर के ख़िलाफ़ पुलिस ने अपनी जांच बंद कर दी है। अव्वल तो इस सरकार में बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज होना ही तारे तोड़ने जैसा है। मामला दर्ज भी हो जाये तो कार्रवाई नहीं होती। पिछली सरकार एक जीजा से प्रभावित थी, यहाँ तो हर बिल्डर सरकार का जीजा हो गया है।
कासनियों, खेमकाओं और जाधवओं सरीखे अफसर क्यों पिछली सरकार को रास नहीं आये और न ही इस सरकार को रास आ रहे हैं। क्यों इन नेताओं, उचक्के बिल्डरों का तिलिस्म टूट नहीं रहा है। दरअसल ये नेता राजनीति करते हैं और बिल्डर नीति से राज । इन बिल्डरों का पिछली सरकार में भी पव्वा फिट था और “ईमानदार” मनोहर लाल सरकार में भी। अभी दो रोज़ पहले माननीय मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी मंसूरी की लाल बहादुर शास्त्री अकादमी में तैयार हो रहे आईएएस अफसरों को ज्ञान बाँट कर आये हैं कि नेताओं की नाज़ायज मांगों को कतई भाव न दें। फिर क्यों उनके खुद के ओएसडी अफसरों को परेशान कर रहे हैं।
अब इस मामले की पृष्ठभूमि पर भी नज़र डालें
रियल एस्टेट कम्पनी ओमेक्स पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है। बंसल पोल्स प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्टर प्रमोद गुप्ता को 9 लाख 20 हजार 623 ₹ देने के बाद भी ना तो फ्लैट दिया जा रहा है और ना ही पैसा वापिस किया जा रहा है। हालांकि धमकिया जरूर मिल रही हैै क्योंकि प्रमोद गुप्ता की शिकायत पर ओमेक्स के डायरेक्टर समेत पांच लोगों पर एफआईआर जो दर्ज हो चुकी हैै। लेकिन इसके बाद भी पुलिस की कार्रवाई आगे नही बढ़ पाई। प्रमोद गुप्ता का आरोप है कि रोहतक के आई जी रहे श्रीकांत जाधव ने जब उनके केस को लेकर कार्रवाई शुरू की तो मुख्यमंत्री के ओएसडी विजय शर्मा ने उन पर केस को रफा-दफा करने का दबाव बनाया और इसकी जानकारी खुद आई जी ने उन्हे दी थी।
ओमेक्स , एक जानी मानी रियल एस्टेट कम्पनी । बहादुरगढ़ में ओमेक्स ने कई बड़े टाॅवर और फ्लैट्स भी बनाये हैं। लेकिन यहां उपभोक्ताओं के साथ फ्लैट्स के नाम पर धोखा भी किया गया है। बंसल पोल्स प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्टर ने ओमेक्स के सैल्सिया टावर में साल 2007 में एक फ्लैट बुक करवाया था। जिसके लिये उन्होंने 23 अप्रैल 2008 तक 6 लाख 30 हजार रुपये की दो किश्तें भी जमा करा दीं लेकिन टाॅवर निर्माण का कोई काम शुरू नही हुआ। इसके 2 साल बाद साल 2010 में उन्हे बताया गया कि सेल्सिया टाॅॅवर बनाने की उनके पास परमिशन नही है, इसलिये उन्हें दूसरी जगह ग्राउन्ड फ्लोर पर 3 बैडरूम का 106 नम्बर फ्लैट अलॉट किया गया है। इसके नाम पर भी गुप्ता ने 2 लाख 90 हजार 623 रुपये की एक और किश्त जमा करा दी। 28 मई 2012 को गुप्ता ने ओमेक्स के साथ बिल्डर बायर एग्रीमेंट साईन किया जिसके बाद उन्हें पता चला कि जिस जगह उन्हे 106 नम्बर फ्लैट अलाॅट किया है वहां तो 9 मई 2012 को ही दुकानें बनाकर बेच दी गई हैं।
ओमेक्स के धोखे से स्तब्ध हो चुके गुप्ता ने इसकी लिखित शिकायत एक दिसम्बर 2014 को एसपी झज्जर के पास की जिस पर 17 दिसम्बर 2014 को एफआईआर नंबर 495 भारतीय दंड संहिता की धाराओं 406/420/467/468/471 के तहत दर्ज हो गई। लेकिन उसके बाद एफआईआर में नामित ओमेक्स के सीएमडी रोहताश गोयल, जेएमडी सुनील गोयल, डायरेक्टर जय भगवान गोयल, संदीप मंगला, मार्किटिंग प्रोफेशनल अनिल वधवा की गिरफ्तारी नही हो पाई। उल्टा उन्हे एफआईआर वापिस लेने के लिये धमकिया दी जाने लगी। प्रमोद गुप्ता का कहना है कि ओमेक्स एक बड़ी कम्पनी है लेकिन वो लोगों के साथ धोखा कर रही है इसलिये उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिये।
प्रमोद गुप्ता का आरोप है सरकार में ओएसडी विजय शर्मा आरोपियों को बचा रहे है। इसके लिये उन्होंने रोहतक के आईजी रहे श्रीकांत जाधव पर भी दबाव बनाया था। गुप्ता का दावा है कि आईजी श्रीकांत जाधव ने ही उन्हे ये बात बताई थी और कहा था कि अपने मामले की जांच सीबीआई से करवाओ क्योंकि प्रदेश की कोई भी एजेंसी बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नही करेगी। क्योंकि आरोपियों के पास काफी पैसा है और वो स्टेट की जांच एजेंसी को भी खरीद लेंगें।
धोखाधड़ी का मामला पूरी तरह से साफ हैै। सारे कागजात और सबूत ओमेक्स के खिलाफ हैं। एफआईआर दर्ज हो चुकी है लेकिन फिर भी पीड़ित को इंसाफ नही मिल रहा है। दबाव बड़ा है तो क्या कोई भी पैसे वाला और ऊँची पहुंच वाला धोखेबाज कुछ भी कर सकता है। केन्द्र सरकार अब रियल एस्टेट रेगुलेशन बिल भी ला चुकी है। तो क्या रियल एस्टेट के धोखेबाजों को सलाखों के पीछे भेजकर पीड़ित को इंसाफ नही मिलना चाहिये। जरूर मिलना चाहिये लेकिन सरकार और प्रशासन चुप है। शायद दबाव बड़ा है और पीड़ित का दर्द छोटा।

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