बिना पटरी उखाड़े, बिना चक्का जाम किये आरक्षण लेने वाला पहला समुदाय बना सवर्ण?

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नई दिल्ली: आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 पर्सेंट आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन वाले विधेयक का प्रपोजल सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने केवल एक दिन में तैयार किया था। इसके बारे में केंद्रीय मंत्रियों को भी जानकारी नहीं दी गई थी। हरियाणा अब तक को ख़ास सूत्रों से पता चला है कि तीन राज्यों की विधानसभा चुनावों में हार के बाद ही भाजपा हाईकमान इस बारे में सोंच रहा था लेकिन ये सोंच तमाम बड़े नेताओं से गुप्त रखी गई थी और अंतिम समय तक इस बात की भनक तमाम बड़े मंत्रियों को नहीं लगी।

एक दो दिन में जो कुछ हुआ वो देश के सामने है। इस बिल में सभी जातियों का ध्यान रखा गया है। बिल रखने के वक्त केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा था कि इस बिल में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जाट, गुर्जर सहित अन्य जातियों के गरीबों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। सोशल मीडिया पर कई मजेदार प्रतिक्रियाएं भी आ रहीं हैं। लोगों का कहना है कि आरक्षण के लिए देश में कई बार बड़े बड़े आंदोलन हुए, रेल ट्रैक जाम किये गए, रेवले की पटरियां उखाडी गईं और आगजनी भी हुई लेकिन ऐसे लोगों को आरक्षण न के बराबर मिला। सवर्ण बिना पटरी उखाड़े, बिना चक्का जाम किये आरक्षण लेने वाले पहला समुदाय बना।

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