अलगाववादियों ने दी थी धमकी, सुप्रीम कोर्ट में 8 हफ्ते के लिए टली धारा 35A पर सुनवाई

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Supreme Court defers hearing by 2 months in #Article35A case

नई दिल्ली: देश भर की निगाहें आज सुप्रीम कोर्ट पर लगीं थीं। जम्मू-कश्मीर में धारा 35A को लेकर आज सुनवाई थी जो अब दो महीने के लिए टाल दी गई है। इस मुद्दे पर अलगाववादियों ने बवाल की धमकी दे रखी थी। अटार्नी जनरल ने छे महीने के लिए सुनवाई टालने की अपील की जिसपर आठ हफ्ते के लिए सुनवाई टाल दी गई। सोशल मीडिया पर एक ट्रोल चलने लगा है जिस पर कहा जा रहा है कि मीलार्ड का ध्यान हिन्दुओं के त्योहारों पर है इसलिए अभी अन्य किसी मुद्दे पर कोई सुनवाई नहीं होगी।

मालुम हो कि अनुच्छेद 35A को मई 1954 में राष्ट्रपति के आदेश के ज़रिए संविधान में जोड़ा गया. ये अनुच्छेद जम्मू कश्मीर विधान सभा को अधिकार देता है कि वो राज्य के स्थायी नागरिक की परिभाषा तय कर सके. इन्हीं नागरिकों को राज्य में संपत्ति रखने, सरकारी नौकरी पाने या विधानसभा चुनाव में वोट देने का हक मिलता है।

इसका नतीजा ये हुआ कि विभाजन के बाद जम्मू कश्मीर में बसे लाखों लोग वहां के स्थायी नागरिक नहीं माने जाते. वो वहां सरकारी नौकरी या कई ज़रूरी सरकारी सुविधाएं नहीं पा सकते. ये लोग लोकसभा चुनाव में वोट डाल सकते हैं. लेकिन राज्य में पंचायत से लेकर विधान सभा तक किसी भी चुनाव में इन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं है। इस अनुच्छेद के चलते जम्मू कश्मीर की स्थायी निवासी महिला अगर कश्मीर से बाहर के शख्स से शादी करती है, तो वो कई ज़रूरी अधिकार खो देती है. उसके बच्चों को स्थायी निवासी का सर्टिफिकेट नही मिलता. उन्हें माँ की संपत्ति पर हक नहीं मिलता. वो राज्य में रोजगार नहीं हासिल कर सकते।

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