बुद्धवार कुर्सी पर बिठाया, वीरवार कुर्सी खींच ली, जाने CBI चीफ आलोक वर्मा संग क्यू हुआ ऐसा

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नई दिल्ली: सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने 77 दिन बाद अपना कार्यभार बुधवार को संभाला था जिसके बाद विपक्ष ने जश्न मनाना शुरू कर दिया और मोदी सरकार की हार बताने लगा लेकिन अब जो कुछ हुआ उसे देख विपक्ष और हैरान दिख रहा है। आलोक वर्मा एक चंद घंटों तक ही कुर्सी पर बैठ सके। उनकी सीबीआई चीफ की कुर्सी पर से हमेशा के लिए छुट्टी कर दी गई। बहाली के 48 घंटों के भीतर सिलेक्शन कमिटी ने आलोक वर्मा को पद से हटा दिया। पीएम मोदी की अगुआई वाली और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे व सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस ए. के. सीकरी की सदस्यता वाली हाई-पावर्ड कमिटी ने सीवीसी जांच रिपोर्ट के आधार पर वर्मा की सीबीआई डायरेक्टर पद से परमानेंट छुट्टी कर दी। आइए, देखते हैं कि वे कौन से 5 आरोप थे, जिस वजह से पीएम की अगुआई वाली सिलेक्शन कमिटी ने वर्मा को हटाया।

उन्हें हटाने के कई कारण बताये जा रहे हैं जिनमे मीट कारोबार मोईन कुरेशी से जुड़ा मामला, रेलवे के दो होटलों का ठेका जिसमे लालू यादव के खिलाफ जांच में मामले में वर्मा पर गंभीर आरोप और हरियाणा का एक जमीन घोटाला, वर्मा 2016 में दिल्ली पुलिस के कमिश्नर थे तो उन्होंने कस्टम डिपार्टमेंट द्वारा पकड़े गए एक गोल्ड स्मगलर को बचाया था। वर्मा पर आरोप हैं कि सीबीआई में रहते हुए उन्होंने कई दागी अफसरों को सीबीआई में लाने का प्रयास किया था। इन्ही सब वजहों से कमेटी ने उनकी छुट्टी कर दी।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 23 अक्तूबर 2018 को देर रात आदेश जारी कर वर्मा के अधिकार वापस लेकर उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। इस कदम की व्यापक स्तर पर आलोचना हुई थी। मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके बाद बुधवार को वर्मा ने कार्यभार संभाल लिया। गुरुवार रात्रि उनकी सीबीआई चीफ की कुर्सी पर सेहमेशा के लिए छुट्टी कर दी गई। देखें सोशल मीडिया पर लोगों की क्या राय है.

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