सीवर का पानी पीने पर मजबूर हैं गरीब, डबुआ फ़्लैट निर्माण में बड़ा घोटाला

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नई दिल्ली: देश के लाखों राजमिस्त्री लोगों के बड़े बड़े मकान तो बना देते हैं लेकिन उनमे से अधिकांश अपने खुद के मकान के लिए आज भी तरस रहे हैं। सिक्के का एक दूसरा पहलू ये भी है कि मकान बनवाने वाले ठेकेदार तो चंद वर्षों में मालामाल हो जाते हैं और अगर ठेकेदार सरकारी विभाग के हैं तो और ज्यादा चांदी कूटते हैं। खास सूत्रों की माने तो सरकारी ठेका लेने वाले कुछ ठेकेदार सरकारी निर्माणों में महा घटिया मैटेरियल का प्रयोग करते हैं और सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को दीवाली जैसे त्योहारों पर बड़ा चढ़ावा चढ़ा खामोश कर देते हैं। नकद नारायण भी चढ़ाते हैं। अगर सरकारी निर्माणों की जांच कराई जाए तो आप पाएंगे कि कहीं दो नंबर की ईंट तो कहीं घटिया क्वालिटी की सीमेंट तो कहीं अन्य चीज आपको दो नंबर की दिखेगी लेकिन जांच कौन कराये? नेता जी को अगला चुनाव भी तो लड़ना है और उन्हें तराजू पर बैठना है, जिसके दूसरे पड़रे पर या तो लड्डू होगा या सिक्के होंगे।

इसलिए स्थानीय नेता लोग भी आँख कान बंद कर लेते हैं। दोस्तों लूट, खसोट, घोटाले का अगर आप जीता जागता उदाहरण देखना चाहते हैं तो हरियाणा के फरीदाबाद जिले की डबुआ कालोनी में पहुंचें जहाँ डबुआ थाने के पास लगभग 10 साल पहले दो हजार के आस पास फ्लैट गरीबों के लिए बनवाये गए थे। 202 फ़्लैट सूरजकुंड के पास रहने वाले गरीबों को दे दिए गए बाकि लगभग 1800 फ़्लैट खाली थे। हरियाणा के सीएम के पास लिखे गए एक पत्र में कहा गया है कि उनकी जय जयकार करने वाले एक दूसरी पार्टी के विधायक के कई चमचे 100 से ज्यादा फ़्लैट किराये पर देकर लाखों हर कमा रहे हैं।

इन फ्लैटों की बात करें तो ये अब गिरने लगे हैं। ऐसा लगता है कि फ़्लैट बनाने वाला ठेकेदार यहाँ सीमेंट की बजाय मिट्टी का प्रयोग किया है। युवाओं को तो नहीं मालूम होगा लेकिन उम्र दराज लोगों को मालूम होगा कि ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के बने मकान भी 5-7 दशक झेल जाते हैं लेकिन यहाँ मिट्टी नहीं सीमेंट से बने मकान एक दशक भी नहीं झेल पाए। ऐसा नहीं होता गर नेता दीवाली पर किसी सरकारी ठेकेदार के मोटे, लम्बे चौंड़े, भारी गिफ्ट का इन्तजार नहीं करता, और नेताओं को देख अधिकारी भी अब ऐसे ही गिफ्ट का इंतजार करते रहते हैं। चोर-चोर मौसेरे भाई की कहावत बहुत पुरानी है। इस कहावत को अगर आप गलत मान रहे हैं तो डबुआ के फ्लैटों को देखें और अगर आप फरीदाबाद, हरियाणा से ज्यादा दूर रहें तो वहां जाएँ, जहाँ कोई सरकारी निर्माण हो रहा है। केंद्र सरकार, राज्यों की सरकारें विकास के लिए जो पैसा देतीं हैं उसे चोर-चोर मौसेरे भाई खा जा रहे हैं। कहीं कहीं तो सिर्फ 50 फीसदी तक जेब में भरा जा रहा है और 50 फीसदी ही लगाया जा रहा है। नेताओं की भी ज्यादा कमी नहीं है, जनता भी तो उनसे चुनाव में दारू मांगती है और जो नहीं पीते हैं वो भी मांगते हैं। नेता देते है और जीत के बाद वसूलते हैं।करोड़ों के घोटाले का एक वीडियो देखें

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