जाट समाज से करोडो का चंदा लेने वालों ने कर लिया सरकार से समझौता? सांगवान

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आज जाट धर्मशाला, भिवानी में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान की अध्यक्षता में प्रेस वार्ता संपन्न हुई, जिसमें उन्होंने बताया कि इसी साल जनवरी और फरवरी में लगभग दो महीने तक हरियाणा के जाटों को जगह-जगह बिठाकर आंदोलन करने वालों ने आज तक ये नहीं बताया कि सरकार के साथ उनका क्या समझौता हुआ क्योंकि उन्होंने कहा था कि जो लड़के जाट आरक्षण के दौरान जेलों में बंद हैं, उनको बाहर निकालने तक आंदोलन चलेगा। जबकि सच्चाई ये है कि आंदोलन के बाद भिवानी जिले के सरल गांव से तथा करनाल जिले से कई लड़के जेल में चले गए हैं। इस आंदोलन में जाट समाज के कीमती समय के अतिरिक्त करोड़ों रुपए खर्च हुए और चंदे के रूप में करोड़ों रुपए एकत्रित भी हुए, उसका भी आज तक पूरा हिसाब-किताब नहीं दिया जा रहा है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए 17 दिसंबर को कलायत में एक बहुत बड़ी रैली का आयोजन किया जा रहा है।

आज के समाचार पत्रों में हरियाणा पिछड़ा आयोग का हवाला देकर आंकड़े दर्शाए गए हैं कि जाटों के पास उनकी जनसंख्या से अधिक नौकरियां हैं। जोकि अनुचित है। क्योंकि केसी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 25.53 हिंदू जाट, 4 प्रतिशत सिख जाट और .5 प्रतिशत मूला जाट हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 31 प्रतिशत से भी अधिक है। इसलिए ये कहना सरासर गलत है कि जाटों के पास जनसंख्या से अधिक नौकरियां हैं। जबकि अभी कुछ दिन पहले एक्स सर्विसमैन हरियाणा सरकार ने अस्थायी रूप में लगाए, उनको भी शामिल कर लिया गया है, जो अनुचित है। इसके अतिरिक्त बीसीबी की जातियों का अलग-अलग जनसंख्या और उनकी नौकरियां भी नहीं दर्शाई गई हैं। हरियाणा में आरक्षण के लिए जाट इसलिए मांग करते रहे हैं क्योंकि केंद्र में आरक्षण के लिए पहले राज्य स्तर पर आरक्षण होना अनिवार्य है।
प्रेस वार्ता में उनके साथ संघर्ष समिति के युवा प्रदेशाध्यक्ष सत्यजीत पिलानियां, एडवोकेट राजनारायण पंघाल, एडवोकेट विरेंद्र दूहन, जोगेंद्र तालू व राजसिंह घणघस आदि थे।

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