टपकते जा रहे हैं आलू के दाम, मिट्टी में मिलते जा रहे हैं किसानों के अरमान

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Potato Rate Down In Haryana

बाबैन, 26 दिसम्बर राकेश शर्मा: दिनोंदिन आलू के घटते दामों को लेकर किसानों में भारी रोष पनप रहा है और किसान को उसकी फसल की दूगने दाम करने को लेकर भाजपा सरकार के दावों की पोल खुलकर जनता के सामने आ रही है। उपरोक्त शब्द लोकतंत्र सुरक्षा मंच के जिलाध्यक्ष नायब ङ्क्षसह पटाकमाजरा ने बाबैन अनाजमंडी में आलु के घटते दामों को लेकर किसानों के साथ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के उपरांत उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि किसानों को आलू की फसल में मुनाफा कमाना तो दूर की बात फसल को तैयार करने पर आया हुआ खर्चा भी पूरा करने के भी लाले पडते दिख रहे हंै जबकि पहले ही किसान की फसल सही दामों पर न बिकने से किसान के लिए खेती करना घाटे का सौदा बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि आलू कि पैदावार हाने से पूर्व आलु की फसल तैयार करने में किसानों का लगभग 30 से 35 हजार रूपये प्रति एकड़ खर्च आ चुका है जबकि आलु के कम दामों में बिकने से किसान को मुनाफा होना तो दूर की बात, किसान को फसल पर किया हुआ खर्च भी पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा सब्जी की फसलों के न्युनतम मुल्य पर लिए जाने की योजना अब तक शुरू न किए जाने से भाजपा का किसान विरोधी चेहरा जनता के सामने उजागर हो रहा है क्योकि अगर आलु की फसल का न्युनतम दाम किसान द्वारा फसल को आने पौने दामों में बेचने के बाद लागु किया जाता है तो उसका किसान को कोई लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यदि प्रदेश सरकार आलु की खरीद के लिए कोई अच्छी निति तैयार करती तो प्रदेश का किसान कर्जे में कभी न डुबता ।

उन्होंने कहा कि किसान जिसे अन्नदाता कहा जाता है आज अगर वही परेशान होगा तो देश कैसे तरक्की करगा। उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा फसलों को तैयार करने में आने वाली लागत को देखते हुए फसल का न्युन्तम मुल्य तय किए जाने से किसान को राहत मिल सकती है लेकिन भाजपा अपने किए वायदों से मुकर रही है। सत्ता में आने से पूर्व भाजपा ने स्वामिनाथन आयोग की रिपोर्ट लागु करने की घोषणा की थी लेकिन अब लागु न करके किसानों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही किसानों के हित को देखते हुए कदम नहीं उठाया तो उन्हें किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सडकों पर उतरने के लिए मजबूर होना पडेगा। इस मौके पर गुलजार ङ्क्षसह कौलापुर, फूल ङ्क्षसह, शीशपाल, सतबीर बहलोलपुर, मनोज, अमर ङ्क्षसह, जसमेर ङ्क्षसह, धर्मपाल व अन्य किसान मौजूद रहे।

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