इन दोनों के पिता ने नहीं झुकाया सोनिया के सामने सिर, राहुल ने लिया बदला? Haryana Ab Tak Sps

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नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में भी कांग्रेस के सीएम पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। पार्टी की तरफ से पर्यवेक्षक बनाकर भेजे गए केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 13 दिसंबर को विधायकों की मीटिंग में लिए गए फैसले को राहुल गांधी को बताया। राहुल गांधी ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं से चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष ने फैसला लिया कि अशोक गहलोत राजस्थान के सीएम होंगे और सचिन पायलट डेप्युटी सीएम होंगे।
हरियाणा अब तक ने पायलट की राजनीति के पुराने पन्नों को अपने हिसाब से खंगाला तो पता चला कि सचिन को बहुत ही सोंच समझकर सीएम की कुर्सी नहीं दी गई है क्यू कि अगर उन्हें सीएम बनाया जाता तो कभी न कभी वो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए ख़तरा वैसे ही बन सकते थे जैसे उनके पिता राजेश पायलट कभी गांधी परिवार के लिए खतरा बनकर उभर रहे थे। यहीं नहीं मध्य प्रदेश में भी राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाव न देकर कमल नाथ के सर पर ताज रख दिया क्यू कि उन्हें लगा कि ज्योतिरादित्य कहीं अपने पिता की राह पर न चल पड़ें। हरियाणा अब तक के पाठकों को मालूम हो कि माधवराव सिंधिया और राजेश पायलट ने कभी गांधियों के सामने माथा नहीं नवाया था और आज गांधी परिवार ने उन दोनों नेताओं के बेटों की मेहनत पर पानी इसलिए फेर दिया।

आपको बता दें कि जब राहुल की मां सोनिया गांधी कांग्रेस की बागडोर संभाल रही थीं, तब सचिन के पिता राजेश पायलट और ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया कांग्रेस के बड़े नेता हुआ करते थे. ये दोनों नेता भी आलाकमान के सामने दंडवत नहीं थे. लेकिन सिंधिया सीनियर और पायलट सीनियर की राजनीति में एक फर्क था, मावधराव कभी आलाकमान के सामने मुखर नहीं हुए, वहीं राजेश पायलट खुलकर सामने आने वाले शख्स बने रहे। इन दोनों नेताओं का आकस्मिक निधन हुआ।

आज दो दशक बाद इन सारे नेताओं की दूसरी पीढ़ी मैदान में है। सोनिया की जगह राहुल हैं, राजेश की जगह सचिन हैं और माधवराव की जगह ज्योतिरादित्य हैं। दोनों ही नेताओं को मनमोहन सिंह सरकार में राज्य मंत्री बनाया जा चुका है। समय के साथ दोनों नेता राहुल के करीब भी आ चुके हैं. इन सबने मिलकर उसी तरह कांग्रेस को संकट से उबारा है, जैसे दो दशक पहले इनके बुजुर्गों ने मिलकर उबारा था। लेकिन इस उत्साह के साथ नेताओं की वर्तमान पीढ़ी में अपने बुजुर्गों के तेवर भी आ गए हैं। ज्योतिरादित्य वही कर रहे हैं, जो उनके पिता ने किया था. यानी शांति से समय के साथ चलना. दूसरी तरफ सचिन वही कर रहे हैं, जो उनके पिता राजेश पायलट ने किया था. यानी अपनी बात के लिए खुलकर मैदान में आना।

जाहिर है सचिन को पता होगा कि किसी भी दूसरी पार्टी की तरह कांग्रेस में भी इस तरह के विरोध को अच्छा तो नहीं ही समझा जाएगा. इस पूरे घटनाक्रम से सचिन को गद्दी मिले या न मिले, 24 अकबर रोड में उनके नंबर जरूर कम हो जाएंगे। हरियाणा अब तक अपने पाठकों को एक बार फिर बता रहा है कि सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया राहुल गांधी से बड़े राजनीतिज्ञ हैं,राहुल को क्या पता, देश में पांच हरी सब्जियां उनके आगे रख दो तो उनके नाम शायद ही बता पाए लेकिन वो सोनिया जी के सुपुत्र हैं इसलिए? और ये दोनों? जिनके पिता? कुछ कांग्रेसियों को ये बात बुरी लगेगी, जिसे लगे लगती रहे लेकिन जरा सोंच लें कि आपसे कम तजुर्बेवाला अगर आपका आका बन आपकी किस्मत और मेहनत पर पानी फेरे तो आपको कैसे लगेगा।
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