BJP-RSS ने रच डाला इतिहास, देश के सभी बड़े पदों पर कर लिया कब्ज़ा, देखती रह गई कांग्रेस

M Venkaiah Naidu takes oath as the next Vice President of India

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी का आज एक बहुत बड़ा सपना पूरा हो गया। ऐसा सपना हर राजनीतिक पार्टियां देखती हैं लेकिन कांग्रेस के अलांवा शायद अब तक किसी भी पार्टी का ये सपना पूरा नहीं हो सका था। अब भाजपा का राष्ट्रपति, भाजपा का प्रधानमंत्री और भाजपा का उपराष्ट्रपति बन गया है। वेंकैया नायडू ने अभी कुछ मिनट पहले देश के 13वें उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई। नायडू ने उपराष्ट्रपति पद के शपथ लेने से पहले राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। उपराष्ट्रपति बनने के साथ ही वेंकैया नायडू संसद की ऊपरी सदन के पदेन सभापति बन गए हैं। आज संसद के सत्र का आखिरी दिन है। इस तरह राज्यसभा की कार्यवाही वेंकैया नायडू के सभापतित्व से समापन होगा। कल पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी को विदा कर दिया गया था। कांग्रेस जिस आरएसएस पर कभी बैन लगाना चाहती थी उसी आरएसएस आज केंद्र की सभी बड़ी सीटों पर कब्जा हो गया । राष्ट्रपति, पीएम और उपराष्ट्रपति सब आरएसएस से जुड़े रहे हैं।

91 साल पहले 27 सितंबर 1925 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी गई थी। केशव बलराम हेडगेवार उसके संस्थापक थे। यह उस दौर की बात है, जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। कांग्रेस का लोगों में काफी प्रभाव था और महात्मा गांधी की लोकप्रियता बढ़ रही थी। देश गुलामी की जंजीरों से बाहर निकलने के लिए आंदोलन कर रहा था। तब शायद ही किसी को यह अहसास रहा होगा कि एक दिन इसी संगठन से निकले लोग देश के दो सबसे बड़े पदों (राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति) काबिज हो जायेंगे। नरेंद्र मोदी 2014 में ही देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं। वह भी स्वयंसेवक रह चुके हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं। और एम.वेंकैया नायडू नायडू भैरों सिंह शेखावत के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि वाले दूसरे उप राष्ट्रपति बन गए हैं। आज का दिन भाजपा और संघ के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि वेंकैया के शपथ के साथ ही देश के चार शीर्ष पदों राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा स्पीकर के पदों पर पहली बार भाजपा और संघ की विचारधारा से जुड़े लोग काबिज हो गए हैं। सोशल मीडिया पर कई दिनों से कुछ जोक चल रहे थे जिसमे कहा जा रहा था देश विदेश के विश्व विद्यालयों में पढ़ने से अच्छा है आरएसएस में शामिल होकर शिक्षा दीक्षा लेना। आज ये जोक जोक नहीं रहा, असलियत में तब्दील हो गया। कांग्रेस आज सोंच रही होगी कि क्या से क्या हो गया। मनन करें कांग्रेसी ऐसा क्यू हो गया। कहाँ उनसे कमी रह गई। अपने सूत्रों की बात करें तो नकारात्मक राजनीति उन्हें डूबी।

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