सरकार खनन विभाग के अधिकारी सब्बरवाल की सम्पति और फोन की जांच कराये: पराशर

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फरीदाबाद: अरावली पर अगर अवैध खनन न होता तो न बड़खल झील सूखती और न ही सूरजकुंड का पानी, न ही सूरजकुंड की झील, ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष एल एन पाराशर का जिन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अरावली पर दो दशकों से अवैध खनन चल रहा है जो अब भी जारी है। पत्थर माफियाओं ने खनन विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर अरावली पर सैकड़ों मीटर की गहराई तक के पत्थर निकाल बेंच खाये हैं जिस कारण अरावली के कई पहाड़ गायब हो गए और वहाँ गहरी खाईं बन गई और इस गहरी खाईं की वजह से अब बड़खल, सूरजकुंड झील में पानी नहीं भरता, सारा पानी गहरी खाईं में चला जाता है। वकील पाराशर ने कहा कि शनिवार मैंने लक्कड़पुर के पास एक खनन का मुद्दा उठाया था जिसके बाद मैंने देखा कि खनन विभाग के अधिकारी संजय सब्बरवाल ने अपने मीडिया को दिए गए बयान में कह रहे हैं कि ये खनन अवैध नहीं है। इसका नक्शा पास किया गया है।
वकील पाराशर ने खनन विभाग के अधिकारी सब्बरवाल को मीडिया के माध्यम से जबाब दिया है और कहा है कि जहाँ का नक्शा पास किया गया है ये खनन वहाँ नहीं हो रहा है। उन्होंने सब्बरवाल से पूंछा है कि क्या आपने ब्लास्ट कर पत्थर निकालने की परमीशन दी है? क्या आपने वहाँ की पहाड़ी को गायब करने की परमीशन दी है?

वकील पाराशर ने मीडिया को बताया कि मैंने हरियाणा सरकार से मांग की है कि खनन विभाग के अधिकारी संजय सब्बरवाल के फोन काल की जांच करवाई जाय और इनकी चल-अचल संपत्ति की भी जांच करवाई जाए। वकील पाराशर ने कहा कि अगर इनके फोन काल की जांच करवाई गई तो सारा मामला जनता और सरकार के सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि लक्कड़पुर के पास जहाँ खनन हो रहा है, पत्थर निकाले जा रहे हैं वहाँ पास में एक बड़ा होटल है और ब्लास्ट कर पत्थर निकाले जा रहे हैं इसलिए होटल में आने जाने वालो को भी खतरा है। उन्होंने बताया कि ब्लास्ट की जानकारी मुझे नहीं थी लेकिन नगर निगम कमिश्नर ने मीडिया को ब्लास्ट की जानकारी दी और कहा कि वो इस मामले की जाँच करवा रहे हैं। वकील पाराशर ने कहा कि मुझे अपने सूत्रों द्वारा ये भी जानकारी मिली है कि वहां से पत्थर निकाल रहे खनन माफियाओं में आपस में भी कल बहस हुई है। उन्होंने कहा कि खनन विभाग के अधिकारी संजय सब्बरवाल की संपत्ति और फोन डिटेल की अगर जांच न करवाई गई तो मैं कोर्ट में याचिका दायर करूंगा।

उन्होंने ने कहा कि फरीदाबाद को देश का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है जिस कारण मैं परेशान हूँ और किसके कारण ऐसा हुआ वो बात भी मैंने सोंच रहा हूँ और मैं बार बार कह चुका हूँ कि अरावली का चीरहरण इस प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण हैं और वन विभाग, नगर निगम और खनन विभाग इसके जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि मैं इन विभागों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुका हूँ लेकिन अब जल्द एक याचिका कई अधिकारियों के नाम दायर करूंगा जो अरावली का चीरहरण करवा रहे हैं और फरीदाबाद की लगभग 25 लाख जनता की सांस में जहर घोल रहे हैं और कइयों की प्रदूषण के कारण जान भी जाने लगी है। उन्होंने कहा कि मैं फरीदाबाद की अस्प्तालों से एक डाटा एकत्रित कर रहा हूँ कि जिले में सबसे ज्यादा मौतें किस बीमारी से हो रहीं है और इन बीमारियों का कारण क्या है। उन्होंने कहा कि अभी तक मुझे कुछ अस्पतालों के बड़े डाक्टरों ने जानकारी दी है कि फरीदाबाद में असमय हो रही मौतों का सबसे बड़ा कारण प्रदूषण है। वकील पाराशर ने कहा कि मैं कई विभागों के अधिकारीयों के ऊपर हत्या का मामला भी दर्ज करवाऊंगा क्यू कि शहर के लोगों को बेमौत मरते नहीं देख सकता।

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