इंसानों को दुकानों में बंद कर ताला लगाने वाले अधिकारियों पर हो सकती है कार्यवाही: पाराशर

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फरीदाबाद: अदालत ने दुकानों को सील करने का आदेश दिया था इंसानों को नहीं इसलिए ऐसे अधिकारियों पर कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होंने दुकान सील करने के पहले उसमे से इंसानों को निकलने का मौका नहीं दिया और वो तीन युवकों को दुकानों में बंद कर बाहर से ताला लगाकर चले हैं। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एल एन पाराशर का जिन्होंने एक सील दुकान के अंदर तीन युवकों की चीख पुकार सुन सीलिंग तुड़वाकर बाहर निकलवाया।

आपको बता दें कि उच्च न्यायालय के आदेश पर नगर निगम प्रशासन ने आज सेक्टर नौ और दस में सीलिंग की और कई अवैध दुकानों को तोड़ दिया। सेक्टर 11 स्थित धर्मा ढाबा भी ढहा दिया गया और ढाबे के आस पास की दुकानों को सील कर दिया गया। ढाबे के पास एक फास्टफूड की दुकान को भी सील कर दिया गया लेकिन इसमें अंदर काम कर रहे तीन युवकों को बाहर निकलने का मौका नहीं दिया गया और बाहर से दुकानों को सील कर दिया गया। अंदर बंद युवक जोर-जोर से चिल्लाते रहे लेकिन अधिकारियों को कुछ नहीं सुनाई दिया। अधिकारी दूकान सील कर चलते बने। लगभग एक घंटे बाद स्थानीय लोगों ने दूकान के अंदर से चीखने की आवाज सूनी जिसके बाद किसी ने एडवोकेट पाराशर को फोन किया। पाराशर तुरंत मौके पर पहुंचे और सेंटर थाने के इंस्पेक्टर को मौके पर बुलाया। सेन्ट्रल थाने के SHO ने सम्बंधित अधिकारियों को सूचित किया और लगभग तीन घंटे बाद सील दूकान का ताला खोल तीनों युवकों को निकाला गया। वकील पाराशर ने कहा कि अवैध निर्माण कहीं भी हों उसे गिराए जाने का मैं स्वागत करता हूँ लेकिन इंसानों का ख़याल रखा जाए उन्हें इस तरह से बंद करने से उनकी जान भी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अधिकारी ऐसी लापरवाही न करें।

मालुम हो कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने योगेंद्र सिंह बनाम हरियाणा सरकार केस में सुनवाई के दौरान अवैध रूप से वाणिज्यिक गतिविधियां चलाने वाले संस्थानों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई का आदेश जारी किया था जिसके बाद आज कार्यवाही हुई। कई दुकाने सील की गईं और कइयों को तोड़ दिया गया।

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