गाथा जलियांवाला बाग के मंचन ने दिखाया 1919 का भयावह मंजर

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कुरुक्षेत्र राकेश शर्मा:हरियाणा कला परिषद् व उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के संयुक्त सहयोग से मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में लाईट एण्ड सांउड शो गाथा जलियांवाला बाग का मंचन किया गया। अनूप शर्मा द्वारा लिखित और मुकेश शर्मा द्वारा निर्देशित शो 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के सौ वर्ष पूरे होने पर शहीद देशप्रेमियों को समर्पित रहा। इस मौके पर राष्टीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्रीविजय मुख्यअतिथि के रुप में उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता मैैक के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा ने की। मंच का संचालन प्रसिद्ध रंगकर्मी व मंच उद्घोषक विकास शर्मा द्वारा किया गया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा प्रस्तुति में दिखाया गया कि एक फौजी जलियांवाला बाग पहुंचता है तो वहां कुछ युवाओं को मस्ती करते देखता है। फौजी उन युवाओं को समझाता है कि यह धरती नमन करने योग्य है। युवाओं के पूछने पर फौजी उन्हें जलियांवाला बाग की दास्तान सुनाता है। वह बताता है कि 13 अप्रैल 1919 को रोल्ट एक्ट के विरोध में लोग यहां जमा हुए थे लेकिन जनरल डायर ने उन पर गोलियां चलाकर मौत की नींद सुला दिया था। इस हत्याकांड के सबसे बड़े गुनहगार थे ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर और लेफ़्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ डायर। उस दौरान जलियांवाला बाग में उधम सिंह भी मौजूद थे जो इस भयावह मंजर को देख कर अंगे्रजो से लोहा लेने की ठान लेते हैं। जनरल डायर को मारने के लिए उधम सिंह संघर्ष करते रहते हैं, लेकिन इसी दौरान 1927 में बीमारी की वजह से रेजीनॉल्ड डायर की मौत हो जाती है। मगर माइकल डायर ज़िंदा था और ब्रिटेन लौट चुका था। माइकल ओ डायर से बदला लेने के लिए शहीद उधम सिंह 1934 में लंदन पहुंचेए वहां उन्होंने एक कार और एक रिवाल्वर खरीदी तथा सही मौके का इंतजार करने लगे और ये मौका आया 13 मार्च 1940 कोए उस दिन उधम सिंह एक किताब में रिवॉल्वर छुपा कर कॉक्सटन हॉल के अंदर घुसने में कामयाब हो गएए जहां माइकल ओ डायर भाषण दे रहा था। उसने कहा कि अगर आज भी उसे दूसरा जलियांवाला बाग कांड करने का मौका मिले तो वो इसे फिर से दोहराएगा, उधम सिंह ने बीच भाषण में ही जलियांवाला बाग कांड के इस गुनहगार को ढेर कर दिया।
अपनी 21 साल पुरानी कसम पूरी करने के बाद उधम सिंह ने भागने की कोई कोशिश नहीं की। उधम सिंह को अंग्रेज पुलिस गिऱफ्तार करके ले जा रही है। लंदन की अदालत में भी शहीद उधम सिंह ने भारत माता का पूरा मान रखा और अंग्रेजांे के सामने नहीं झुका। 31 जुलाई 1940 को पेंटविले जेल में उधम सिंह ने हंसते-हंसते फांसी को चूम लिया। इस प्रकार शहीद उधम सिंह के जज्बे और देशप्रेम को सुनकर चारों युवा भी देश के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान करने का प्रण लेते हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्यअतिथि द्वारा कलाकारों को सम्मानित किया गया।

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