भारत तेरे टुकड़े के नारे लगाने वालों के खिलाफ चार्जशीट फ़ाइल, सुनवाई कल

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नई दिल्ली: 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आत्मघाती हमले के दोषी जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकवादी मोहम्‍मद अफजल गुरु को 9 फ़रवरी 2013 की सुबह दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया। लेकिन उसके तमाम समर्थक अब भी देश में मौजूद हैं। अफजल गुरू को फांसी पर लटकाए जाने के विरोध में ही जेएनयू में एक कार्यक्रम आयोजित गया था जिसमे देश विरोधी नारे लगाए गए थे और आज दिल्ली पुलिस ने नारे लगाने वालों की चार्जशीट फ़ाइल कर दी जिसमे जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया, सैयद उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य, आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईस रसूल, बशरत अली, और खलिद बशीर भट के नाम हैं। फ़ाइल चार्जशीट में आईपीसी की धारा 124A, 323, 465, 143, 149, 147, 120B के तहत इन आरोपियों पर मामला दर्ज किया गया था।

चार्जशीट में बताया गया है कि इन लोगों ने जो नारे लगाए थे उनमे ‘हम लेके रहेंगे आजादी…, संगबाजी वाली आजादी…, भारत तेरे टुकड़े होंगे…, कश्मीर की आजीदी तक जंग रहेगी…, भारक के मुल्क को एक झटका और दो…, भारत को एक रगड़ा और दो…, तुम कितने मकबूल मरोगे…, इंडियन आर्मी को दो रगड़ा… आदि नारे शामिल हैं।

इस मामले पर सोशल मीडिया पर दोपहर से ही बहस छिड़ी है कोई पुलिस पर आरोप लगा रहा है तो कोई पुलिस के साथ खड़ा दिख रहा है। सरकार पर भी कुछ लोग इस मामले को लेकर आरोप लगा रहे हैं।
आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता आशुतोष ने लिखा है कि


आशुतोष को जबाब देते हुए पत्रकार रोहित सरदाना ने लिखा है कि जिस देश में पत्रकार और नेता देशद्रोह के नारे लगाने वालों के साथ खड़े हो जाते हों, वक़ील आधी रात में आतंकवादी की फाँसी रुकवाने कोर्ट खुलवा देते हों – वहाँ की पुलिस टाइम से चार्जशीट कर के भी क्या कर लेगी?


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