ड्रिंक पी होटल में मरने वाली अभिनेत्री को तिरंगा और देश के लिए जान देने वाले इंस्पेक्टर को कफ़न, महा कलयुग

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नई दिल्ली: सच लिखने में हमें ज्यादा परेशानी नहीं होती बल्कि जब हम सच लिख रहे होते हैं तो दिल को बड़ा सकून मिल रहा होता है हाँ ये सच कुछ लोगों को बुरा भी लगता होगा, ये भी हमें मालुम है। कलयुग है, अधिकतर लोग न सच बोल पाते हैं न सच लिख पाते हैं और न ही सच बर्दाश्त कर पाते हैं। लिखने वालों पर तमाम बंदिशें होती हैं। गलत लोग सच लिखने वालों के दुश्मन भी बन बैठते हैं। आज एक सच लिख रहा हूँ कुछ लोगों को बुरा लग सकता है। जिसे लगे लगता रहे। ऐसे सच आगे भी जारी रहेंगे।
दोस्तों इसी साल फरवरी में अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत हुई थी। खबरों में आया कि वो कोई चीज पीकर बाथरूम के टब में डूब गईं। कुछ लोगों ने कहा कि वो शराब पीकर? दोस्तों श्रीदेवी की दुबई में मौत हुई कैसे हुई ये तो जांच अधिकारियों का काम है लेकिन जब दुबई से उनका शव आया तो तिरंगे में लिपटा था। तिरंगे में लिपटे शव अधिकतर देश पर मर मिटने वाले जवानों के देखे जाते हैं? लेकिन?

खैर कोई बात नहीं, कलयुग है पता नहीं इस युग में क्या क्या देखा जाएगा। हाल में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक इसंपेक्टर की जान ड्यूटी के वक्त गई। अभी तक उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिला और इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की जिस तरह हत्या हुई और ड्यूटी के समय हुई, उनके अंतिम संस्कार के समय उनके शव पर कफ़न दिखा, तिरंगा नहीं। कलयुग है? समझदार लोग समझ जाएँ। पता नहीं देश की राजनीति कितनी कलयुगी हो चुकी है। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार ने देश के लिए जान गँवा दी जबकि श्रीदेवी? कोई शराब के कारण कोई कुछ और लिख रहा था ? है न कलयुग और अब तो लगता है कलयुग महा कलयुग के रूप में तब्दील हो चुका है। अपने पास तमाम उदाहरण हैं। लिखूंगा तो न जाने कितनों की नींद हराम हो जाएगी।

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