रातोरात लोग हो जाते हैं गरीब और अमीर, किस बात का आर्थिक आरक्षण: सांगवान

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भिवानी। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमाडेंट हवा सिंह सांगवान ने आज जाट धर्मशाला में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि गरीब स्पर्णों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण छलावे के सिवा और कुछ नहीं है। इस आरक्षण से जाटों को फायदे की बजाय नुकसान होगा क्योंकि पहले हम 50 प्रतिशत में हिस्सेदार थे, अभी 40 प्रतिशत में रह जाएंगे। क्योंकि यदि ऐसा होता तो हम स्वर्ण जातियों से निकलकर पिछड़ों में आरक्षण क्यों मांगते। जहां तक स्वर्ण जातियों के गरीबों की बात है, उनको भी कोई विशेष फायदा होने वाला नहीं है क्योंकि गरीबी प्रमाण पत्र आखिरकार स्वर्ण जातियों के शिक्षित और संपन्न लोगों के ही बनेंगे और इसका नतीजा भविष्य में दो-तीन साल में सिद्ध भी हो जाएगा। जहां तक आर्थिक आधार के आरक्षण की बात है, ये बिल्कुल भी व्यवहारिक नहीं है क्योंकि किसी की भी आर्थिक स्थिति स्थायी नहीं होती। रातों-रात लोग धनी हो जाते हैं और गरीब हो जाते हैं। लेकिन इसके लिए प्रमाण-पत्र रोज-रोज नहीं बदले जा सकते हैं। यदि वास्तव में सरकार ने गरीबों की सहायता करनी है, तो उनके बच्चों को सीधे तौर पर आर्थिक मदद करे ताकि वे धनी बच्चों का मुकाबला कर सकें।


ये सरकार का कदम पूर्णतया राजनीति से प्रेरित है क्योंकि इस सरकार को गरीबों से कोई लेना-देना नहीं है। इसी कारण ये एक नई पार्टी होते हुए भी आज इसके पास कांग्रेस से कहीं अधिक चंदा जमा है। विपक्षी पार्टियां राजनीतिक तौर पर मजबूर होकर इसका समर्थन कर रही हैं क्योंकि कोई भी पार्टी अपना वोट कम नहीं होने देना चाहती। इसलिए ये सरासर वोट की राजनीति है। इसलिए गरीबों को इस भ्रमजाल में फंसने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।
प्रेस वार्ता में उनके साथ एडवोकेट सत्यजीत पिलानियां, रघुबीर सिंह बूरा, एडवोकेट राजनारायण पंघाल, राजसिंह घणघस, जोगेंद्र तालू आदि मौजूद थे।

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