जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों का मनोबल गिराने में कोई कमी नहीं छोड़ रही है सरकार

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नई दिल्ली: देश में आतंकी घटनाएं बढ़ीं हैं। जम्मू-कश्मीर में हर रोज सीजफायर का उल्लंघन कर आतंकवादियों को भारत में भेज रहा है। जम्मू-कश्मीर के कुछ लोग आतंकियों को पनाह दे रहे हैं और ये वही लोग हैं जो सेना पर पत्थर बरसाते हैं। इन पर से मामले भी वापस ले लिए जाते हैं जिस कारण इनका मनोबल और बढ़ता है जबकि सेना पर मामले दर्ज करवा सरकार सेना का मनोबल गिराने में कोई कमी नहीं छोड़ रही है। जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में मार्च 2015 के बाद से अब तक सेना एवं अन्य सुरक्षा बलों के खिलाफ 16 (एफ.आई.आर.) आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि 1 मार्च, 2015 को भाजपा और पी.डी.पी. ने आपसी सहमति से तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में गठबंधन सरकार का गठन किया था। इन मामलों में सुरक्षा बलों के जवानों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भीड़ से निपटते समय जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया।

विभाग के अनुसार ऐसे 14 मामलों में जांच चल रही है। एक मामला अंडर ट्रायल है जिसमें बडग़ाम जिले के मगम पुलिस थाने में तैनात रहे 2 पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई है। इसके अलावा पाम्पोर पुलिस थाने में दर्ज एक अन्य मामले में चालान पेश किया जा चुका है। हालांकि, इस रिपोर्ट में सेना, अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का सिलसिलेवार ब्यौरा नहीं दिया गया है। ऐसे मामलों से सेना के जवानों का मनोबल गिर रहा है साथ में स्थानीय पुलिस भी परेशान है।

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