सिनेमा आधुनिक युग में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय साधन बन गया है: शर्मा

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Haryana minister rambilas sharma news

महेंद्रगढ़, प्रीतम सिंह शेखावत: सिनेमा आधुनिक युग में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय साधन बन गया है । सिनेमा की शुरूआत भारत में परतंत्रता काल में हुई । दादा साहेब फाल्के जैसे जुझारू लोगों ने निजी प्रयत्नों से सिनेमा को भारत में प्रतिष्ठित किया । फिर धीरे- धीरे लोगों का सिनेमा के प्रति आकर्षण बढ़ा । आज भारत का चलचित्र उद्योग विश्व सिनेमा से प्रतिस्पर्धा कर रहा है । उक्त शब्द शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने अपने मुम्बई दौरे के दौरान फिल्म इंडस्ट्रीज का दौरा जहंा वे फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र, सन्नी देओल, बोबी देओल सहित अनेक फिल्मी हस्तियों से मुलाकात की यह जानकारी उनके मीडिया सलाहकार राजेश यादव ने दी।

रामबिलास शर्मा ने कहा कि सिनेमा विज्ञान की अद्भुत देन है । फिल्मों के निर्माण में अनेक प्रकार के वैज्ञानिक यंत्रों का प्रयोग होता है । शक्तिशाली कैमरे, स्टूडियो, कंप्यूटर, संगीत के उपकरणों आदि के मेल से फिल्मों का निर्माण होता है । इसे पूर्णता प्रदान करने में तकनीकी-विशेषज्ञों, साज-सज्जा और प्रकाश-व्यवस्था की बड़ी भूमिका होती है । फिल्म बनाने में हजारों लोगों का सहयोग लेना पड़ता है । यह जोखिम भी होता है कि लोग इसे पसंद करते हैं या नापसंद करते हैं । अत: सिनेमा क्षेत्र में एक व्यवसाय की सभी विशेषताएँ पायी जाती हैं ।

शर्मा ने कहा कि शुरूआत में मूक सिनेमा का प्रचलन था । अर्थात् सिनेमा मैं किसी प्रकार की आवाज नहीं होती थी । लोग केवल चलता-फिरता चित्र देख सकते थे । बाद में आवाज वाली फिल्में बनने लगीं । चित्र के साथ ध्वनि के मिश्रण से इस क्षेत्र में क्रांति आई । इससे फिल्मों में गीत-संगीत का दौर आरंभ हुआ । लोगों का भरपूर मनोरंजन होने लगा । नौटंकी, थियेटर आदि मनोरंजन के परंपरागत साधन पीछे छूटने लगे । सिनेमाघरों का फैलाव महानगरों से लेकर छोटे-बड़े शहरों तक हो गया । बाद में श्वेत-श्याम फिल्मों की जगह जब रंगीन फिल्में बनने लगीं तो सिनेमा-उद्योग ने नई ऊँचाइयों को छूआ ।

शर्मा ने कहा कि सिनेमा का विश्व- भर में प्रसार हुआ है । दुनिया की लगभग सभी भाषाओं में फिल्में बन रही हैं । भारत में भी सभी प्रमुख भाषाओं में फिल्में बनती हैं । इनमें भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी में बनी फिल्मों का सबसे अधिक बोलबाला है । भारत की व्यवसायिक राजधानी मुंबई इसका केन्द्र है । इसीलिए यह मायानगरी के नाम से प्रसिद्ध है । इस अवसर पर नवीन पुर, प्रदीप भी उनके साथ थे।

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