हरियाणा के लोग जमकर दे रहे हैं जीएसटी: प्रदेश को मिला पहला स्थान

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चंडीगढ़: हरियाणा में जीएसटी लागू होने के बाद हरियाणा का टैक्स बेस बढ़ा है। जीएसटी क्लेक्शन में हरियाणा का प्रतिव्यक्ति पूंजी राजस्व संग्रह देश में सबसे ज्यादा है और पिछले 3 महीनों में ही हरियाणा देश में ई-वे बिलों के सृजन में चौथे स्थान पर है। इसके साथ ही हरियाणा सबसे ज्यादा जीएसटी एकत्र करने वाला देश का 5वां राज्य है।
यह जानकरी कैप्टन अभिमन्यु ने कल एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए दी।
उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद हरियाणा में 1.85 लाख नये डीलर्स के पंजीकरण के बाद 82.22 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी की शुरूआत से पहले हरियाणा में वैट, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर के तहत करदाता 2.25 लाख थी, वहीं आज डीलरों की संख्या लगभग 4.10 लाख है। उन्होंने कहा कि जीएसटी में डीलर्स के अनिवार्य पंजीकरण की सीमा 5 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। इसी प्रकार जीएसटी के तहत, हरियाणा में करदाताओं द्वारा रिटर्न दाखिल करने का अनुपालन राष्टï्रीय औसत से लगातार 5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत अधिक रहा है, जोकि 98.27 प्रतिशत है और यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम व्यापारियों के सहयोग और विभाग के अधिकारियों की कार्यकुशलता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का ऐसा पहला देश हैं जहां इतने बड़े स्तर पर एक राष्टï्र-एक कर के भाव से जीएसटी का क्रियान्वयन सर्व सम्मति के साथ आसानी से हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान तीन पूर्ण वित्त वर्ष हुए हैं जिनमें 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में वाणिज्यिक करों के तहत अपने राजस्व संग्रह में क्रमश: 10.47 प्रतिशत की वृद्धि दर, 11.90 प्रतिशत और 24.10 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ दो अंकों की बढ़ौतरी दर्ज की है। उन्होंने कहा कि वैट, सीएसटी, एसजीएसटी, इत्यादि के तहत वर्ष 2015-16 में 21546.98 करोड़ रुपए, वर्ष 2016-17 में 24301.61 करोड़ रुपए तथा वर्ष 2017-18 में 29941.43 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रहण हुआ है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में 1 अप्रैल 2018 से 30 जून 2018 के बीच लगभग 1.12 करोड़ ई-वे बिल सृजित किये गए हैं, जिससे देश में ई-वे बिलों के सृजन में हरियाणा चौथे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों ने 1.10 लाख ई-वे बिलों की फिजिकल जांच की, जिसमें उन्होंने अनियमितताओं के 3358 मामलों का पता लगाया और अप्रैल और मई, 2018 के दो महीनों में 21.37 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में एक राष्टï्र एक कर-जीएसटी की शुरूआत काफी अच्छी रही है और भौगौलिक दृष्टि से छोटा राज्य होने के बावजूद हरियाणा सबसे ज्यादा जीएसटी एकत्र करने वाला देश का 5वां राज्य है। जीएसटी के तहत हरियाणा का प्रतिव्यक्ति पूंजी राजस्व संग्रह देश में सबसे ज्यादा 1876.97 रुपये है। उत्तराखंड में 1436.21 तथा महाराष्ट्र में 1165.85 रुपये प्रतिव्यक्ति है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 के दौरान एकत्रित औसत राज्य जीएसटी 1505.93 करोड़ रुपये था और वर्ष 2018-19 के पहले तीन महीनों के दौरान यह 1,804.96 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो सालाना 19.85 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा ने राष्ट्रीय स्तर पर जीएसटी के ढांचे के सफल गठन और कार्यान्वयन में हरियाणा का योगदान उल्लेखनीय रहा है। जीएसटी काउंसिल की सभी 27 बैठकों में हरियाणा ने सक्रिय रूप से भाग लिया और राज्य के हित में कई निर्णय भी जीएसटी काउंसिल से करवाये, जिसमें विशेष रूप से कृषि संचालन पर कर की छूट को कम से कम करने को सुनिश्चित किया गया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य के आग्रह पर ट्रैक्टरों पर कर की दर 28 प्रतिशत से 12 प्रतिशत और ट्रैक्टर के पार्टस पर कर की दर 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक की गई। इसी प्रकार उर्वरकों पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई। राज्य में सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर की सहायता के लिए, प्लाईवुड पर कर 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक कम किया गया, वैज्ञानिक उपकरणों पर 18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक और कृषि उपकरणों पर कर की दर 12 प्रतिशत के निचले स्लैब पर रखी गई। कृषि उपकरणों के पार्टस पर कर की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत की गई है।
उन्होंने कहा कि एंटी प्रोफ्रेटीयरिंग के लिए राज्य स्तरीय अग्रिम विनियम प्राधिकरण और स्क्रीनिंग कमेटी की स्थापना की गई। एक अतिरिक्त आयुक्त को अतिरिक्त आयुक्त (अपील) के रूप में अधिसूचित किया गया है। उन्होंने बताया कि एसएमएस अलर्ट, ईमेल और नियमित रूप से रिटर्न फाइल ना करने वालों के विरूद्ध जारी कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं और अन्य कार्रवाई भी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत खाद्य पदार्थों पर छूट दी गई है। वैट के तहत खाद्यान्नों पर 5 प्रतिशत कर लगाया गया है। खाद्यान्न से राज्य का कुल संग्रह 1100 करोड़ रुपये था। हरियाणा राज्य एक मैनुफैक्चरिंग स्टेट है। पूर्व जीएसटी शासन में, अंतर-राज्य लेनदेन पर राज्य को सीएसटी के तहत कर अर्जित किया जाता था। जीएसटी के बाद राज्य को लगभग 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि आईजीएसटी निपटान के तहत हरियाणा को 952 करोड़ रुपये प्रतिपूर्ति के रूप में मिले हैं।

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