हरियाणा मंत्रिमंडल ने अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम, 2018 को मंजूरी दी

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चण्डीगढ़, – हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल की अध्यक्षता में कल हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में अनुसूचित जातियों पर किसी भी प्रकार के अत्याचार की गुंजाइश को समाप्त करने के लिए हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम, 2018 को अधिनियमित करने की मंजूरी दी गई।

नियमों के तहत, हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया जाएगा। आयोग अनुसूचित जातियों के कल्याण और संरक्षण के लिए भारत के संविधान में या इस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत या सरकार के किसी आदेश के तहत उपबंधित विभिन्न सुरक्षा उपायों के कार्यों की जांच एवं निरीक्षण करेगा। आयोग अनुसूचित जातियों के अधिकारों तथा सुरक्षा के वंचित होने के संबंध में विनिर्दिष्ट शिकायतों की जांच करेगा और ऐसे मामलों को उचित प्राधिकरणों के साथ उठाएगा। इसके अतिरिक्त, आयोग अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रफ्यि में शामिल होगा, सलाह देगा और उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करेगा। आयोग अनुसूचित जाति के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सुरक्षा और अन्य उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सरकार द्वारा किए जाने वाले उपायों के बारे में सिफारिश करेगा और हर वर्ष और ऐसे अन्य समय पर जैसा कि आयोग उचित समझे, सरकार को रिपोर्ट करेगा। आयोग अनुसूचित जातियों के संरक्षण, कल्याण, विकास और उन्नति के संबंध में ऐसे अन्य कार्यों का निर्वहन करेगा ।

आयोग के पास एक सिविल कोर्ट की सभी शक्तियां होंगी और विशेष रूप से भारत के किसी भी हिस्से से किसी भी व्यक्ति को समन करने, हाजिर होने और शपथ पर उसकी जांच करने, कोईं भी आवश्यक दस्तावेज मंगवाने, हलफनामे पर सबूत प्राप्त करने, किसी भी अदालत या कार्यालय से किसी भी सार्वजनिक रिकॉर्ड की मांग करने या उसकी प्रतिलिपि बनवाने, गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए कमीशन जारी करने के अधिकार के अलावा और कोई अन्य मामला जो निर्धारित है या निर्धारित किया जा सकता है।

आयोग में एक अध्यक्ष और चार गैर-सरकारी सदस्य होंगे। अध्यक्ष किसी भी अनुसूचित जाति से संबंधित एक प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा, जिसे सामाजिक जीवन में व्यापक अनुभव होगा और जिसने सरकारी गतिविधियों में कार्य एवं योगदान दिया हो या अनुसूचित जाति से संबंधित सरकार का सेवानिवृत्त अधिकारी होगा। सदस्य सचिव, जो सरकार का अधिकारी है या रहा है और जो विशेष सचिव के पद से नीचे का नहीं होगा। चार गैर-सरकारी सदस्यों में से कम से कम एक महिला होगी और वे अनुसूचित जाति से संबंधित होंगे और उन्होंने अनुसूचित जाति के कल्याण और उत्थान के लिए कार्य किया हो और सेवा की हो।

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