सत्ताधारी विधायकों से नाराज हैं हरियाणा के BJP कार्यकर्ता, अमित शाह की बाइक रैली होगी फेल?

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update Amit Shah In Haryana

नई दिल्ली: हरियाणा के भाजपा नेताओं ने खुद को 2014 का भाजपा नेता समझ रखा है जिनकी सोंच है कि एक इशारे पर कार्यकर्ता दौड़े चले आएंगे। खास सूत्रों की मानें तो अमित शाह की रैली में जो दावे किये जा रहे हैं वो दावे चारो खाने चित हो जाएंगे। कहा जा रहा है कि रैली में हर विधानसभा क्षेत्र से 1111 बाइकें जींद पहुंचेंगी लेकिन सूत्र जो बता रहे हैं रैली में 50 हजार से बहुत कम बाइकें पहुंचेंगी जिस प्रमुख कारण है कि कई जिलों के भाजपा कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहें हैं। तमाम कार्यकर्ता निकाय और नगर निगम चुनावों के बाद से अपनी पार्टी से नाराज हैं जिनका गुप्त रूप से कहना है कि पार्टी के लिए बहुत बसें हमने भरीं, कई रैलियों में सैकड़ों लोगों को ले जाते थे लेकिन पार्टी ने निगम और निकाय चुनावों में हमें झुनझुना पकड़ा दिया। या तो अपने चहेतों में टिकट बाँट दिया या कुछ पैसे वालों को टिकट दे दिया गया, हमें बेज्जत होना पड़ा इसलिए इस हम अब ऐसी किसी रैली से तोबा कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा हालात फरीदाबाद के  खराब दिख रहें हैं जहां से कुल हजार बाइकें जींद पहुँच जाएँ तो बहुत बड़ी बात होगी। एनआईटी, बल्लबगढ़ और बड़खल से बहुत कम बाइकें जाएंगी जैसा की सूत्रों द्वारा पता चल रहा है। गुप्त रूप से कुछ भाजपा मंडल अध्यक्षों का कहना है कि हमें सूरजकुंड मेले के लिए एक पास के काबिल भी नहीं समझा गया और हम 200 किलोमीटर बाइक से क्यू जाएँ। अंदरखाने की बात करें तो फरीदाबाद के तमाम भाजपा कार्यकर्ता अपने विधायकों से असंतुष्ट हैं। ऐसे कार्यकर्ता आस पास की भाजपा बैठकों में भले ही चले जाएँ लेकिन जींद तक शायद ही जाएँ। जींद वही जाएंगे जो किसी सत्ताधारी विधायक के काफी करीबी हैं और जो मलाई खा रहे हैं।

कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्रीय राज्य मंत्री कृषणपाल गुर्जर कहें तो एक दो नहीं सौ दो सौ बाइक रैली में ले जाएंगे लेकिन स्थानीय विधायकों के कहने से एक भी नहीं ले जायेंगे। कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधायक अपने फायदे के लिए हमारा इस्तेमाल 2014 से करते चले आ रहे हैं लेकिन जहां हमारे किसी फायदे की बात आती है वहां विधायकों को सांप सूंघ जाता है। कुल मिलाकर कार्यकर्ता अपनी पार्टी से बहुत नाराज हैं। फरीदाबाद ही नहीं रोहतक से अनूप कुमार सैनी, झज्जर से संतोष सैनी और कुरुक्षेत्र से राकेश शर्मा की माने तो इन जिलों के कार्यकर्ता भी खुश नहीं हैं और रैली में यहाँ से भी बहुत कम लोग जाएंगे। इसलिए बड़े भाजपा नेता समझ लें कि अब वो 2014 वाले नेताजी नहीं रह गए हैं। कार्यकर्ता किसी भी पार्टी की नींव होते हैं और भाजपा अपनी नींव को हरियाणा में कमजोर करती जा रही है।

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