CMP की कविता कृष्णन ने की किसानों की आतंकवादियों की तुलना तो दिल्ली के पूर्व मंत्री ने लताड़ा

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नई दिल्ली: हाल में देश में शहर नक्सलियों का मुद्दा उठा था और हरियाणा के फरीदाबाद जिले की सुधा भारद्वाज सहित कई लोगों को नजरबन्द किया गया था जो अब भी नजरबन्द ही है। शहरी नक्सली देश के लिए घातक होते हैं और आतंकवादियों से ज्यादा काण्ड दोनों तरह के नक्सली करते हैं। ये नक्सली किसी भी भेष में आपके साथ घुल मिलकर आपके राज दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। देश को खतरे में डाल सकते हैं। ये किसी पार्टी की टोपी या चोला पहन काण्ड करते रहते हैं। इन्हे जल्द पहचाहना मुश्किल है और अगर आप इन्हे पहचानना चाहें तो जेएनयू के टुकड़े टुकड़े गैंग के बारे में कुछ लिख दें और कश्मीर के पत्थरबाजों के बारे में लिख दें तो इस नक्सलियों के कमेंट्स पढ़ आप इनके अंदर के इंसान को पहचान सकते हैं। दिल्ली बार्डर पर कल किसानों और पुलिसकर्मियों में टकराव हुआ और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री का कहना है कि किसानों का आंदोलन हिंसक न होता अगर किसानों के भेष में किसानों के साथ कुछ शरारती तत्व मौजूद न होते। सोशल मीडिया पर आज कहा जा रहा है कि किसानों के बीच में शहरी नक्सली भी थे जिनके कारण कल आंदोलन हिंसक हुआ और ये नक्सली अपने मकसद में कामयाब हो गए।

आपको बता दें कि वामपंथी विचारधारा की कही जाने वाली कविता कृष्णन ने एक ट्वीट किया है जिसमे उन्होंने कल के किसानों की तुलना जम्मू कश्मीर के पत्थरबाजों से की है। उनके ट्वीट के बाद लोगों का कहना है कि मैडम ने आतंकियों से किसानों की तुलना कर दी और संभव है किसानों के बीच में कुछ शहरी नक्सलियों को भेजा गया हो। कृष्णन के ट्वीट का जबाब देते हुए दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने लिखा है कि 1947 की बंटवारे की मानसिकता वाले लोग
2013 की मेरठ की फ़ोटो दिखाकर
2018 की सरकार को गाली देकर
कश्मीर के पत्थरबाजों को सही साबित करना चाहते हैं

चाहे केजरीवाल हो या कविता कृष्णन – अचानक देश में भड़काऊं माहौल बनाने की, आग लगाने की बेचैनी साफ दिख रही हैं

इसके बाद लोग कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं पढ़ें

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