हरियाणा में गीता जयंती घोटाला? गर्ग ने उठाये खट्टर सरकार पर सवाल

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कुरुक्षेत्र राकेश शर्मा: पवन गर्ग, महामंत्री, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी और पुर्व अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी ने बताया कि – कुरुक्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव एक बार फिर आरोपों के घेरे में फस गया है। पिछले वर्ष गीता जयंती के घोटालों को उजागर करने के लिए हमने राज्यपाल महोदय को ज्ञापन भी सौंपा था और महोत्सव में हुए सभी घोटालों को बताया था। लेकिन इस वर्ष भी वही घोटाले देखने को मिल रहे है।गर्ग का कहना है गीता जयंती को मुख्य पंडाल इस साल डेढ़ करोड़ में लगा और यही पंडाल पिछले वर्ष ढाई करोड़ में लगाया गया था। हमारे प्रयास के द्वारा इस बार ये खर्च कम् तो हुआ परंतु अभी भी ये राशि बहुत ज्यादा है । गौर करने वाली बात यह है कि दोनों वर्षों के पंडाल एक ही कम्पनी ने लगाए हैं। घूमने आए लोगों के अनुसार मुख्य पंडाल कोई आकर्षण का केन्द्र नहीं है, लेकिन इसके ऊपर करोड़ों रूपये खर्च हो गए। गर्ग ने बताया कि लाईट एंड साउंड शो के टैंडर भी एक ही कंपनी को मिला। गीता जयंती महोत्सव में धन की बर्बादी और श्रद्धालुओं के चेहरे पर मायूसी लगातार देखने को मिल रही है। दो वर्षों में गीता जयंती महोत्सव के ऊपर खर्च हुई राशि से तो एक भव्य ऑडिटोरियम बन सकता था। इस महोत्सव में बहुत से सेलिब्रेटी भी बुलाए गए मगर पंडाल एवं कुर्सियां खाली दिखाई दिए। मौजूदा सरकार सरकारी कर्मचारियों और स्कूली बच्चों के सहायता से ही इस महोत्सव को सफल बनाने पर जूटी हुई है क्योंकि महोत्सव में भीड़ कहाँ से दिखेगी अगर स्कूली बच्चे नहीं आएंगे। इतनी सर्दी के होते स्कूली बच्चे दूर-दूर से ब्रह्मसरोवर के तट पर आते हैं। इससे सरकार की क्रूरता का परिचय मिलता है।

गर्ग ने अपने सम्बोधन मे कहा कि सही रूप मे माने तो गीता मनीषी जय राम विद्यापीठ के महाराज ब्रह्मचारी ब्रहमस्वरूप जी और प्रो. हिम्मत सिंह सिन्हा जी हैं । गीता के प्रति इनका भाव व लगाव देखने को मिलता है । आदरणीय महाराज ने अपना पुरा जीवन गीता के प्रचार एवं प्रसार के लिए सम्प्रित कर दिया। मौजुदा सरकार गीता महोत्सव की महिमा की महता को कम कर रहे है ।

गर्ग ने कहा कि पिछले दिनों गीता जयंती महोत्सव के दौरान एक घटना सुनने को मिली कि एक गुब्बारे पर पाकिस्तान जिंदाबाद लिखा हुआ था। इस घटना के बाद सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नही उठाया गया। मौजूदा सरकार को अपराधिक प्रवृत्ति वाले लोग ठेंगा दिखाकर चले गए। उन्होने कड़ी सुरक्षा को भी पस्त का दिया। इससे पता चलता है कि सरकार आम व्यक्ति की जान एवं माल की सुरक्षा नहीं कर सकती ।

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