दूध नहीं जहर पीता है इंडिया, करोड़ों भारतीयों को बेमौत मार रहे हैं दूध माफिया?

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नई दिल्ली: देश भर में एक सन्देश कई दिनों से वाइरल ही रहा है जिसमे दावा लिया गया है कि दूध नहीं जहर पीता है इंडिया, उत्पादन 14 करोड़ लीटर, खपत 64 करोड़ लीटर, इस वाइरल सन्देश के बाद कई न्यूज़ एजेंसियों ने इस खबर की सच्चाई जानने का प्रयास किया और उनके द्वारा जो ख़बरें छापी गईं हैं उससे आपके होश उड़ सकते हैं। अधिकतर न्यूज़ एजेंसियों का दावा है कि सच में अधिकांश भारतीय दूध नहीं जहर पीते हैं।

न्यूज़ एजेंसियों की मानें तो देश में दूध माफियाओं का बोलबाला है। दूध में पानी ही नहीं कई तरह के केमिकल से नकली दूध बनाकर बेंचा जा रहा है। इसके अलावा यूरिया, स्किम्ड मिल्क पाउडर का भी इस्तेमाल होता है। नकली दूध बनाने में डिटर्जेंट पाउडर, साबुन, सिंथेटिक दूध का भी इस्तेमाल होता है. दूध में फैट दिखाने के लिए वेजिटेबल ऑयल और फैट का इस्तेमाल होता है। दूध को फटने से बचाने के लिए हाइपोक्लोराइड्स, क्लोरामाइंस, हाइड्रोजन पैराऑक्साइड, बोरिक एसिड का इस्तेमाल होता है. दही, पनीर, मक्खन और क्रीम बनाने में भी हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।

वाइरल मैसेज में कहा गया है कि ये मिलावट बंद न करवाई है दो 2015 तक 80 फीसदी से ज्यादा भारतीय कैंसर की चपेट में आ सकते हैं। वाइरल मैसेज काफी हद तक ठीक है। देश में मिलावटखोरी बड़े पैमाने पर हो रही है। खाद्य पदार्थों में भी मिलावट की जाती है। कई तरह की दालों को केमिकल से पेंट कर चमकाया जाता है। हरी सब्जियों को भी केमिकल से हरा बनाया जाता है। देश के भारतीय जहर खाने पीने पर मजबूर हैं। मिलावटखोरों पर कोई भी विभाग शिकंजा नहीं कस पा रहा है। देश दीवाली मना रहा है। डाक्टर एक और सीजन का इन्तजार कर रहे हैं जब दीवाली बाद मिलावटी मिठाइयां खा तमाम लोग अस्पताल पहुंचेंगे। सच में कलयुग इसी को कहते हैं।

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