दहेज़ उत्पीड़न में अब तुरंत गिरफ्तारी, एडवोकेट राजेश खटाना ने उठाया सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल

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नई दिल्ली: देश में दहेज़ के अधिकतर मामले फर्जी होते हैं। किसी और बात पर नोकझोंक होने पर भी दहेज़ का मामला थोंप दिया जाता है शायद यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट का कल का फैसला अधिकतर लोग हजम नहीं कर पा रहे हैं। आपको बता दें कि सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज होने के तुरंत बाद अब पीड़ित महिला के पति और उसके ससुराल वालों की गिरफ्तारी की जा सकती है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत के ही पहले के फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए परिजनों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा समाप्त कर दी।

अदालत ने कहा कि पीड़ित की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। खंडपीठ ने कहा कि मामले की शिकायत की जांच के लिए परिवार कल्याण कमेटी की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस को यदि जरूरी लगता है तो वह आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर सकती है। आरोपियों के लिए अग्रिम जमानत का विकल्प खुला है। सुप्रीमकोर्ट ने इसी साल अप्रैल में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। चीफ जस्टिस ने आज फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि 498ए के दायरे को हल्का करना महिला को इस कानून के तहत मिले अधिकार के खिलाफ है और दो-सदस्यीय खंडपीठ के फैसले के तहत दी गयी कानूनी सुरक्षा से वह सहमत नहीं हैं।

मालुम हो कि पिछले साल 27 जुलाई को 2 जजों की खंडपीठ ने दहेज उत्पीड़न निरोधक कानून के दुरुपयोग की शिकायतों को देखते हुए ऐसे मामलों में पति व ससुराल वालों की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

फरीदाबाद के जाने माने वकील राजेश खटाना ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को एक अच्छा फैसला नहीं बताया है। एडवोकेट राजेश खटाना का कहना है कि दहेज़ उत्पीड़न के मामलों में पहले ठीक तरह से जांच होनी चाहिए तब आगे की कोई कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर साल दहेज उत्पीड़न के करीब 1 लाख मामलों में लगभग 10 हजार मामले फर्जी पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पूरे परिवार पर केस दर्ज करवा दिया जाता है, बाद में जांच में मामला फर्जी निकलता है लेकिन इस दौरान अगर पूरे परिवार की गिरफ्तारी होती है तो पूरा परिवार बेकसूर होते हुए भी जेल जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उनके पास भी दहेज़ के सैकड़ों मामले आये जिनमे अधिकतर फर्जी पाए गए इसलिए दहेज़ उत्पीड़न के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी का फैसला  बिलकुल उचित नहीं है। इस फैसले से कई बेकसूर परिवार बरबाद हो सकते हैं।

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