खुद ही प्रदूषण बढ़ाते हैं दिल्ली वाले, दूसरों पर आरोप लगा राजनीति करते हैं केजरीवाल: मुकेश वशिष्ठ

Delhi people increase pollution

फरीदाबाद: दिल्ली समेत हरियाणा, यूपी, पंजाब में छाए स्मॉग की चर्चा राजनेताओं की जुबां से लेकर सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियों में है। पिछले एक सप्ताह से विशेषकर दिल्ली व एनसीआर में लगातार वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। इसका असर भारत और खासकर दिल्ली आने वाले सैलानियों पर भी पड़ रहा है। एनजीटी हो या फिर सुप्रीम कोर्ट लगातार सरकारों को इस विषय पर फटकार लगा रही हैं। ऐसे में उम्मीद थी कि दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल गंभीरता से इस मुददे पर दूसरे राज्यों से सामन्जस्य बैठाकर बातचीत कर कोई हल निकालेंगे। लेकिन हर बार की भांति दिल्ली सीएम लोगों के स्वास्थ्य की चिंता छोड इसबार भी सियासत करते नजर आ रहे है।

नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 500 है तो रोहतक में भी इतना ही है और पंजाब से सटे जींद में यह 821 है। जींद के लोगों के स्वास्थ्य को ज्यादा खतरा है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, सोनीपत, पानीपत और करनाल में भी हालात बुरे हैं। हिसार, सिरसा और कैथल जिलों में स्मॉग ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा हैै। हालात को गंभीरता से प्रयास करते हुए हरियाणा सरकार लगातार किसानों से संपर्क साधे हुए हैै। जिसके परिणामस्वरूप इस वर्ष हरियाणा के लोगों ने पराली कम जलाई। यह बात सेटेलाइट से प्राप्त चित्रों के जरिए वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणिक हो चुकी हैै। वर्तमान समस्या का मुख्य कारक पंजाब है। लेकिन पंजाब सरकार इस गंभीर मसले का दोष केंद्र सरकार पर मथने पर अमादा है। जबकि पंजाब सरकार जानती है कि उसने पराली जलाने के रोकथाम पर कभी गंभीरता से प्रयास नहीं किए। दिल्ली सीएम भी लोगों के स्वास्थ्य की चिंता छोड इस मुद्दे में वोटबैंक तलाश रहे है। इसलिए उन्होंने दिल्ली के 40 हजार किसान, एयर कंडीशनर संस्कति को आरोपी न मानते हुए सीधे हरियाणा के किसानों को जिम्मेदार ठहरा रहे है। सीएम केजरीवाल का आरोप है कि हरियाणा की सरकारें किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए कारगर उपाय नहीं करती हैं। दूसरी तरफ दिल्ली के इर्दगिर्द करीब 40 हजार परिवार 40 हजार हेक्टेयर जमीन पर खेती होती है। दूसरे राज्यों की भांति दिल्ली का किसान भी फसल की कटाई मशीनों से कराता ह, जिससे बड़ी ठूंठ रह जाती है और उसे जलाना पड़ता है।

इस बारे में जब हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने केजरीवाल से पूछा तो उन्होंने बेतुका बयान देकर पल्ला झाड लिया और कहा कि दिल्ली में किसान फसलों को जड़ के करीब से काटते हैं। यह बात गले से उतर नहीं रही। जिम्मेदारी लेने की बजाए केजरीवाल का बयां नासमझ भरा है। क्योंकि वे सच्चाई बताकर किसानों को नाराज नहीं करना चाहते। साथ की केजरीवाल इस बात की उपेक्षा क्यों कर रहे हैं कि दिल्ली में एक-एक परिवार में तीन-तीन, चार-चार कारें हैं। एक-एक घर में पांच-पांच एयर कंडीशनर चलते हैं।वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इससे भी लग जाता है कि एक दशक से कोई शोध रिपोर्ट तैयार नहीं की गई। सही मायने में दिल्ली सीएम बिमारी का इलाज जाने बिना सिर्फ नोंटकी कर रहे हैं। कभी वे हेलीकॉप्टर से पानी के छिड़काव की बात करते है तो कभी ऑड-इवन लागू करने की। कभी स्कूल बंद कर देते है तो कभी पराली का धुआं रोकने के लिए हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखने की। आरोप-प्रत्यारोप में फंसे केजरीवाल को लोगों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं हैं। यह कटु सत्य है कि दिल्ली खुद ही प्रदूषण का स्तर बढ़ाए हुए है। जिसपर दिल्ली सरकार और दिल्लीवासियों को कडा फैसला लेना होगा। साथ ही दिल्ली सीएम को अपने गैर-जिम्मेदार व्यवहार को छोड इस मुददे पर गंभीरता से प्रयास करने होंगे।

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