हुड्डा ने बिचौलियों के साथ मिलकर जमीन अधिग्रहण का भय दिखाकर किसानों के साथ किया बड़ा फ्रॉड

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चण्डीगढ़,13 मार्च- हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की सरकार ने बिचौलियों के साथ मिलकर जमीन अधिग्रहण का भय दिखाकर किसानों के साथ एक बड़ा फ्रॉड किया है।
मानेसर भूमि घोटाले पर आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि हरियाणा की निवर्तमान कांग्रेस के कार्यकाल में जमीनों के घोटाले किए गए। लोगों को लूटा गया, यह बात जगजाहिर है। जनता के मन में तो यह बात पहले ही थी और मीडिया ने भी इसे उजागर किया है। सर्वोच्च न्यायालय अब इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि तत्कालीन सरकार और उसके मुख्यमंत्री श्री हुड्डा ने मानेसर की 680 एकड़ जमीन अधिग्रहण का डर दिखाकर बिचौलियों के साथ मिलकर किसानों को उनकी जमीन औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर किया। सरकार ने उस जमीन को सरमाएदारों और बिल्डरों के साथ मिलकर अपने फैसले से रिलीज करके उस पर कालोनियां विकसित करने का काम किया। उन्होंने बताया कि अब सर्वोच्च न्यायालय ने उस जमीन को किसानों को वापिस कर देने का काम किया है। अन्तोगत्वा सच्चाई की जीत हुई है और किसानों को न्याय मिला है।
सर्वोच्च न्यायालय ने यहां तक कहा कि जो बिचौलियों ने पैसे का लेन-देन किया है, सरकार उसकी जांच एजेन्सी से करवाकर, छानबीन करके उस पैसे को भी सरकार के खजाने में जमा करवाने का काम करे।

कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि सदन में कुछ सदस्यों ने इस विषय पर चर्चा करना चाहा, अखबार में प्रकाशित खबर पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग इस पर चर्चा न करें, यह बात तो समझ में आती है परन्तु इनेलो की इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन में चर्चा न करना, जबकि वे बार-बार कहते रहे हों कि हमने चार्जशीट दी है, जिस में से एक चार्ज पर सर्वोच्च न्यायालय ने अंतिम निर्णय कर दिया हो तब भी उस पर चर्चा न करना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि आज अचानक इनेलो के सदस्य पासा पलटते हुए दिखाई दिए। आज वे अचानक कांग्रेस के भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के वकील बने दिखाई दिए। आज मुद्दे पर बहस न कर उसे दरकिनार करते हुए दिखाई दिए। यह हरियाणा की जनता के लिए बहुत ही विचारणीय विषय है। कहीं न कहीं हरियाणा की जनता इस पर विचार जरूर करेगी। यह सच्चाई सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि कहीं यह सारा का सारा मामला मिल-जुलकर तो नहीं हुआ है। इस मामले में इनेलो के लोगों की क्या भूमिका हो सकती है कि वे इस मामले पर चर्चा करने को भी तैयार नहीं हैं।

तत्कालीन हुड्डा सरकार में हुए भ्रष्टाचार के घोटालों की परत दर परत खुलती जा रही है। उनका सबसे पहला प्रयोग श्री हुड्डा के भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला में किसानों को लूटने का पहला प्रयोग रोहतक में दिल्ली रोड स्थित उदार गगन नाम की कम्पनी के साथ मिलकर अधिग्रहण की हुई जमीन को हुड्डा सरकार ने रिलीज कर लाईसैंस दिया था। अब सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आया हुआ है कि उस जमीन को किसानों को वापिस देने का काम किया है तथा साथ ही सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश था कि उसकी जांच किसी उचित एजेन्सी से करवाई जाए, पूरी जमीन का सैक्शन 9 अवार्ड होने के बावजूद किन परिस्थितियों में जमीन की रजिस्ट्रियां हुई, किन परिस्थितियों में लाईसैंस की एप्लीकेशन लगी, किन परिस्थितियों में लाईसैंस दिए गए। यह सब हुड्डा सरकार द्वारा मिलीभगत कर किसानों को लूटने का काम किया गया। सदन के नेता ने सदन के पटल पर भरोसा दिलाया कि उसकी पूरी जांच करवाने के लिए मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है,
कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि वहीं सोनीपत में उसी प्रकार की जमीन के घोटाले की जांच भी सीबीआई को सौपने के निर्णय की घोषणा सदन के पटल पर की है। उन्होंने कहा कि रोहतक में आईएमटी के सामने दिल्ली रोड पर सनसिटी के नाम से जो कालोनी विकसित हुई यह सैक्टर 27-28 की लगभग पौंने पांच सौ एकड़ जमीन के घोटाले का मामला है ।
कैप्टन अभिमन्यु ने आज विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष के पास बजट पर बोलने को कुछ नहीं है, वे इस बात से हतप्रभ है कि भाजपा ने प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों को हुए नुकसान के लिए उन्हें 3000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक मुआवजा प्रदान किया है। इतना ही नहीं किसान, कृषि और गांव के कल्याण के लिए इतनी बड़ी बढ़ोतरी और इतना बड़ा खजाने का मूंह खोलने का काम किया है।

कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि किसानों के नाम पर राजनैतिक रोटियों सेंकने वालों की कहीं न कहीं राजनैतिक जमीन खिसक गई हैं, उनके पास बोलने को कुछ नहीं है। इसलिए वे केवल सत्र का समय जाया कराने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वे स्वीकार करते है, शब्द अच्छे है आंकड़े अच्छे हैं विधानसभा के पटल पर कहा गया एक-एक शब्द सत्य से अलग नहीं हो सकता है। यह बजट एक गम्भीर विषय है विपक्ष से हम बजट पर ईमानदार आलोचना व सुझाव की भी अपेक्षा करते है यहां तक कि समालोचना का भी हम स्वागत करते हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के साथियों के पास बजट पर बोलने के लिए कुछ नहीं है, बजट जैसा महत्वपूर्ण सत्र और बजट जैसा महत्वपूर्ण दस्तावेज जो पक्ष-विपक्ष की चर्चा व बहस के बिना प्रदेश के अढ़ाई करोड़ लोगों की आमदनी और खर्च के एक-एक बिन्दू पर चर्चा होनी चाहिए थी।

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