जनता नहीं करेगी और इंतजार, दिल्ली में इसलिए हुई BJP की ABVP की हार

Massive jump in petrol rates after dynamic pricing – Decoding the price rise

नई दिल्ली: इंतजार का मतलब प्रतीक्षा करना होता है लेकिन वर्तमान युग में ज्यादा इंतजार कोई करना नहीं चाहता। अगर किसी बैंक या अन्य लाइन में कोई खड़ा है तो उसकी निगाह लाइन के सबसे अगले व्यक्ति की तरफ होती है और लाइन में बीच में जो खड़े होते हैं उनकी तरफ भी होती है। ऐसा लिए क्यू कि पीछे खड़ा व्यक्ति प्रयास करता रहता है कि किसी तरह बीच में घुस जाए। जान पहचान वालों को खोजता रहता है। यहां तक कि प्रेमी-प्रेमिका जो आसमान से तारे लाने की बात करते हैं वो भी इस युग में इन्तजार नहीं कर पाते हैं। प्रेमी या प्रेमिका को थोड़ा सा भी इन्तजार करना पड़ जाए तो नाक सिकोड़ लेते हैं, तारे तोड़कर लाने का वादा करने वाले वाले आपस में मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं। 2014 में देश में भाजपा की सरकार आई, लोगों को भाजपा से बहुत उम्मीदें थीं और लोग इन्तजार करते रहे कि मोदी जी ने कहा है अच्छे दिन आएंगे लेकिन ऊपर बता चुका हूँ कि ज्यादा इन्तजार इस युग में किसी को पसंद नहीं है। जिस अच्छे दिन का लोग इंतजार कर रहे हैं वो अब तक नहीं आया जबकि अगला लोकसभा चुनाव अगले साल ही हो सकता है। एक महीने में डीजल पेट्रोल के दाम लगभग सात रूपये प्रति लीटर बढ़ गए लोग इन्तजार कर रहे थे कि मोदी जी और उनके इस विभाग के मंत्री कुछ सोंचेंगे लेकिन आज पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल और डीजल के दाम की दैनिक समीक्षा रोकने के लिए सरकार के हस्तक्षेप से इनकार किया है।

ईंधन के दाम में जुलाई के बाद से 7.3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के साथ उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने यह बात कही। मंत्री ने यह भी कहा कि सुधार जारी रहेगा। उन्होंने कहा, समय आ गया है कि जीएसटी परिषद पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करे। एक जानकारी के मुताबिक़ सरकार ने नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के दौरान 9 बार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया। वैश्विक स्तर पर ईंधन के दाम में नरमी को देखते हुए उत्पाद शुल्क बढ़ाए गए। कुल मिलाकर इस दौरान पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 11.77 रपये प्रति लीटर तथा डीजल पर 13.47 रपये की वृद्धि की गई। शुल्क वृद्धि से सरकार का 2016-17 में उत्पाद शुल्क संग्रह बढ़कर 2,42,000 करोड़ रुपये हो गया। दाम बढ़ने के कारण आम चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं। जनता और इन्तजार करने के मूड में नहीं है। कुछ छात्र संगठन चुनावों में भाजपा से सम्बंधित एक संगठन को युवा आइना दिखाने लगे हैं। समय है सरकार सुधर जाए वरना जनता ज्यादा इन्तजार नहीं करेगी।

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