शाह ने जताया KP गुर्जर पर भरोषा, कसौटी पर खरे उतरे कृष्ण पाल तो चंडीगढ़ ज्यादा दूर नहीं

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नई दिल्ली: हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जिस तरह से भरोषा जताया है और राजस्थान विधानसभा चुनावों में उन्हें अहम् जिम्मेदारी सौंपी है उसे देखकर लगता है कि अगर राजस्थान में भाजपा को विजय श्री मिलती है तो केंद्र में गुर्जर का कद और बढ़ेगा और वो दिन भी आ सकता है जब गुर्जर चंडीगढ़ की सबसे ऊँची वाली कुर्सी पर पहुँच सकते हैं। चंडीगढ़ की कुर्सी के लिए अफवाह तो पिछले विधानसभा चुनावों में भी गुर्जर के पक्ष में थी लेकिन बाजी मनोहर लाल मार ले गए। सितम्बर में फिर एक बड़े अखबार में एक खबर छपी जिसमे गुर्जर को अगली बार चंडीगढ़ की कुर्सी के काबिल बताया गया। हरियाणा के दो और केंद्रीय मंत्रियों का नाम उस सूची में था लेकिन गुर्जर उनसे ऊपर इसलिए थे क्यू कि वो दोनों मंत्री पुराने भाजपाई नहीं हैं और कांग्रेस से भाजपा में आये हैं। कहा जाता है कि भाजपा अपने पुराने कार्यकर्ताओं को समय पर बड़ा मौका देती है और एक बात ये भी कही जाती है कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जिसमे साधारण कार्यकर्ताओं ने भी बड़े बड़े पद के लायक समझे गए है और वर्तमान में कई ऐसे कार्यकर्ता बड़े पद पर विराजमान हैं जो किसी समय में एक साधारण कार्यकर्ता थे लेकिन वो पार्टी के साथ उस समय भी जुड़े रहे जब पार्टी के पास पाने को कुछ नहीं गंवाने को बहुत कुछ था और ऐसे मौके पर दलबदलू कार्यकर्ता उस दल में भाग गए जिस दल के पास सत्ता थी लेकिन जो नहीं भागे आज वो बड़े पदों पर विराजमान हैं।

कृष्णपाल गुर्जर लगभग ढाई दशकों से भाजपा से जुड़े हैं और पार्षद से केंद्रीय मंत्री पद तक पहुंचे। अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन पर भरोषा कुछ सोंच समझ कर जताया है। गुर्जर विनम्र जरूर हैं लेकिन एक मंझे हुए नेता हैं। विरोधियों को सही समय पर सटीक जबाब देने में माहिर हैं और वो किसी विशेष धर्म जाति की राजनीति नहीं करते। हर किसी को साथ लेकर चलते हैं। राजस्थान में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव हैं। राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। इनमें 142 सीट सामान्य, 33 सीट अनुसूचित जाति और 25 सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और वसुंधरा राजे सीएम बनी थीं। इसके 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी 25 सीटों पर कब्ज़ा किया था। लेकिन दिसंबर 2017 में राज्य के निकाय उपचुनावों में ज्यादातर सीटें जीतकर कांग्रेस ने बीजेपी के माथे पर बल ला दिए हैं। सूबे में कांग्रेस की स्थिति फिर से मजबूत करने में जुटे सचिन पायलट इस बार वसुंधरा राजे को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जो चुनावी चाणक्य कहे जाते हैं और उनकी अध्यक्षता में भाजपा ने कई राज्यों में सरकार बनाई। कोई नहीं सोंच सकता था कि जम्मू कश्मीर जैसे राज्य में भी भाजपा इतने सीटें जीत सकती है लेकिन पार्टी को वहाँ काफी सफलता मिली थी और उस चुनाव में भी फरीदाबाद के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर को अहम् जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उन्हें कामयाबी भी मिली थी। जहां जहां उन्होंने प्रचार किया था कई सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों को जीत मिली थी।
राजस्थान की बात करें तो वहां लगभग 6 फीसदी गुर्जर मतदाता हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कृष्ण पाल को इसी लिए मैदान में उतारा है ताकि ये 6 फीसदी मत भाजपा के पक्ष में जाएँ। अब देखना है कृष्ण पाल क्या जलवा दिखाते हैं। वैसे सूत्रों की मानें तो गुर्जर ने तैयारियां शुरू कर दीं हैं और एक बड़ी टीम राजस्थान में उतारेंगे। इस टीम में भाजपा के अच्छे कार्यकर्ताओं के साथ सोशल मीडिया के तजुर्बेकार भी शामिल रहेंगे। शाह जिन विधानसभा क्षेत्रों में गुर्जर को जिम्मेदारी देंगे ये टीम वहाँ अपनी सारी ताकत झोंक देगी।

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