आरक्षण का विरोध करने पर 12 दिन से तिहाड़ जेल में बंद हैं फरीदाबाद के दीपक गौड़

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फरीदाबाद: आरक्षण विरोधी पार्टी के राष्ट्रिय संयोजक दीपक गौड़ को भी नेशनल दस्तक, खटीक टाइम्स , दलित न्यूज़ के पत्रकारों और दलित सेना, BMS, बामसेफ एवं बीएसपी ने मिलाकर जानबूझ कर झूठा फंसाया है क्योंकि दीपक गौड़ न तो घटना स्थल पर मौजूद थे राष्ट्रपति भवन और प्रधान मंत्री कार्यालय गए थे उसी संसद मार्ग थाने के ड्यूटी आफिसर के साथ पुलिस जीप में बैठकर न ही उन्होंने किसी भी गाली दी, न उन्होंने कोई कागज या बीडी सिगरेट जलाया, न किसी जाति का नाम लिया। आरक्षण विरोधी पार्टी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आगे कहा है कि लोक-सभा और राज्य सभा में एससी एक्ट के नए प्रावधान में बिना जांच किये और बिना मेडिकल परिक्षण करवाए सूचना मिलते ही सीधे जेल भेजे जाने के कारण लाखों की संख्या में निर्दोष व्यक्तियों के फंसने और 6 महीने जमानत न होने से उनके परिवार और व्यवसाय के बर्बाद हो जाने की आशंका को ध्यान में रखते हुए आरक्षण विरोधी पार्टी द्वारा 9 अगस्त को संसद मार्ग पर शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन और संसद मार्ग पर मार्च का आयोजन किया गया था और प्रधान-मंत्री एवं महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने हेतु विधिवत संसद मार्ग थाना से अनुमति लेकर आयोजन किया गया था.
आरक्षण विरोधी पार्टी के मूल संविधान में जातिगत आरक्षण एवं जाति और धर्म आधारित सभी कानूनों को समाप्त किये जाने का स्पष्ठ उल्लेख है दीपक गौड़ आरक्षण विरोधी पार्टी के संविधान के मूल उद्देश्यों की ली गयी शपथ के आधार पर इस प्रदर्शन में शामिल हुए यदि यह असंवैधानिक है तो मुकद्दमा चुनाव आयोग के ऊपर दर्ज होना चाहिए चुनाव आयोग ने पार्टी को रजिस्ट्रेशन नंबर क्यों आबंटित किया
you tube न्यूज़ चेनल नेशनल दस्तक और रॉयल खटीक टाइम्स के पत्रकारों ने आरक्षण विरोधी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा से बार-बार जातिवादी सवाल पूंछे हर प्रश्न में ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया और दलित शब्दों का इस्तेमाल किया और ठाकुर एवं ब्राह्मणों पर जातिवाद बढ़ाने का आरोप लगाया परन्तु आरक्षण विरोधी पार्टी अध्यक्ष संजय शर्मा ने एक बार भी किसी जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया एक भी गाली किसी को नहीं दी एक बार भी कोई कागज अपने हाथ से नहीं जलाया और जिस समय कथित संविधान की प्रतियाँ जलाने का जिक्र किया जा रहा है उस समय घटना स्थल पर मौजूद भी नहीं थे नेशनल दस्तक और खटीक टाइम्स के पत्रकार भी इस वास्तविकता से पूर्णतया परिचित थे क्योंकि उन्होंने ही अपने फुटेज उपरोक्त संगठनो को सौंपकर मुकद्दमा दर्ज करवाया और जानबूझकर आरक्षण विरोधी पार्टी के कार्यकर्ता संजय शर्मा और दीपक गौड़ का नाम उपरोक्त मुकद्दमे में घसीटा.
संसद मार्ग थाना पुलिस ने FIR में वर्णित घटना क्रम का अवलोकन किये बिना और संसद मार्ग पर लगे cctv कैमरों की फुटेज जांचे बिना ही सीधे रिपोर्ट दर्ज कर 10 अगस्त की रात को ही दीपक गौड़ को हिरासत में ले लिया संसद मार्ग थाना के रिपोर्ट दर्ज करने वाले IO ने एक बार भी उसी संसद मार्ग पर उपस्थित अपने थाने के ड्यूटी आफिसर से भी यह नहीं पूंछा की उपरोक्त घटना के समय वह कहाँ था अन्यथा यह ज्ञात हो जाता की दीपक गौड़ उपरोक्त घटना के समय प्रधान मंत्री कार्यालय और संसद भवन गए हुए थे.
संसद मार्ग थाने के बर्बरता पूर्ण रवैये की एक और मिशाल देखिये 10 अगस्त को दर्ज मुकद्दमे में एससी एक्ट नहीं लगाया गया था पुरे एक हफ्ते पुलिस सोती रही कोई cctv फुटेज चेक कर यह नहीं देखा की कोई निर्दोष इस मुकद्दमे में शिकार तो नहीं बना बल्कि उपरोक्त संगठनो के दबाब में आकर 16 अगस्त को उपरोक्त मुकद्दमे में एससी एक्ट भी जोड़ दिया है
दीपक गौड़ को निर्दोष होते हुए भी आज तिहाड़ जेल में बंद हुए 12 दिन बीत चुके हैं परन्तु किसी भी अधिकारी, संगठन या मीडिया हाउस ने सत्यता की जांच करने का बीड़ा नहीं उठाया है.
आरक्षण विरोधी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा व राष्ट्रीय संयोजक दीपक गौड़ पूर्णतया निर्दोष हैं क्या कोई सामाजिक संगठन या मीडिया हाउस आरक्षण विरोधी पार्टी के निर्दोष कार्यकर्ताओं को रिहा करवाने के लिए आगे आएगा क्या कोई पहल कर सभी cctv फुटेजों का अवलोकन करवाकर या उपरोक्त दलित संगठनों द्वारा प्रमाण के तौर पर पेश की गयी फुटेजों को चेक कर निर्दोषों को फंसाने वालों के खिलाफ कार्यवाही करवाने हेतु आगे आएगा.

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